अनुराग लक्ष्य, 14 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
एजुकेशन पाना अब शायद इतना आसान नहीं रहा, क्योंकि हर छेत्र की तरह यहां भी अब तमाम मुश्किलें और बाधाएं आए दिन कहीं न कहीं देखने को मिल ही जाती हैं ।
अब एक नया परकरड सामने आया जिससे भाषाई अल्पसंख्यक महाविद्यालों में विद्यार्थियों को आनलाइन परवेश की परकिर्या में महाविद्यालो लिए दिक्कतें सामने आ रही हैं। परवेश के लिए जिन विद्यार्थियों के नाम दिए जा रहे उनमें कई ऐसे नाम हैं जो भाषाई अल्पसंख्यक की श्रेणी में नहीं आ सकते।
इससे परेशान होकर कॉलेज के प्रबंधक मांग कर रहे हैं कि पुरानी वेवस्था के मुताबिक विद्यार्थियों को फिर से कॉलेज के स्तर पर ही कोटा सीट पर पर्वेश की अनुमति दी जाए।
इस मामले में डालमिया लायंस कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनामिक्स के ट्रस्टी कन्हैया लाल सराफ ने कहा कि पहले सरकार ने भाषाई अल्पसंख्यक कोटे की सीटों पर हमें दाखिले की अनुमति दे रखी थी, किंतु अब हमारे कॉलेज में अनुदानित 1080 सीटें हैं जिनमें 540 सीटों पर हम भाषाई अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को सीधा दाखिला दे देते हैं। लेकिन अब इस कोटे के तहत दाखिले के लिए भी शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की सूची भेज रहा है। उस लिस्ट में नाडर, बाघेला, फर्नांडीस, जैसे उपनाम वाले विद्यार्थी हैं। इन विद्यार्थियों को हिंदी भाषी कोटे के तहत दाखिला कैसे दिया जा सकता है।
दिक्कत इस बात की है जो सूचना जारी कर रहे हैं, उन्हें पता ही नहीं है कि भाषाई अल्पसंख्यक कोटे में कौन से विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाना चाहिए और किसे नहीं। ऐसी परिकिर्या सामने आने से कॉलेज के वेवस्थापक काफी अपने आपको परेशान महसूस कर रहे हैं। फिलहाल उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि इस् समस्या का कोई जल्द ही समाधान भी निकल आएगा।