श्रीसंतगाेपाल मंडपम में वैदिक मंत्रोचार से श्रीरंगराघव भगवान की हुई प्राणप्रतिष्ठा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। रामनगरी के नवनिर्मित श्रीसंतगाेपाल मंडपम में विधि-विधान पूर्वक श्रीरंगराघव भगवान की प्राणप्रतिष्ठा हुई। सर्वप्रथम दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्राेच्चार संग 81 कलशाें में भरे हुए पंचामृत, फलाें का रस और सर्व औषियाें से भगवान का अभिषेक किया गया। उसके बाद श्रीरंगराघव का दिव्य श्रृंगार हुआ। तदुपरांत विविध पकवानाें का भाेग लगाकर भव्य आरती उतारी गई। प्राणप्रतिष्ठा बाद रविवार को गाेदाेहन, उत्थापन, नित्य हवन-पूजन, कलशयात्रा आदि कार्यक्रम हुआ। श्रीसंतगाेपाल मंडपम के पीठाधिपति श्रीमज्जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी कूरेशाचार्य ने बताया कि स्वामी संतगाेपालाचार्य महाराज अयाेध्या के एक महान संत रहे। जिनका सन् 2011 में परम पद हुआ। उन्हीं की स्मृति में श्रीसंतगाेपाल मंडपम का निर्माण किया गया। उसी संतगाेपाल मंडपम् में विधि-विधान पूर्वक श्रीरंगराघव भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की गई। श्रीरंगनाथ भगवान सूर्यवंशी और अयोध्या के कुलदेवता हैं। प्रभु श्रीराम जब लंका से आए। ताे उनके साथ विभीषण भी थे। विभीषण लंका नही जाना चाहते थे। श्रीराम ने उनसे कहा मैंने तुम्हें लंकेश बनाया है तुम्हें जाना ही पड़ेगा। विभीषण ने प्रभु से कहा ठीक है। ताे काेई अपना चिन्ह ही दे दीजिये। जिसे देखकर आपका स्मरण करते रहेंगे। तब श्रीराम ने श्रीरंगनाथ भगवान काे दे दिया। वह वर्तमान में श्रीरंगम त्रिचनापल्ली में विद्यमान हैं। जाे श्रीरंगनाथ भगवान अयोध्या से श्रीरंगम दक्षिण भारत चले गए थे। उन श्रीरंगनाथ भगवान काे पुन: अयोध्या लाया गया। जाे नाै फिट लंबे व सात फिट ऊंचे हैं। उनका वजन साै किलाे का है, जिसमें प्रभु श्रीसीताराम रंगनाथ भगवान की गाेद में विराजमान हैं। ऊपर छत्र लिए भरतलाल, दाहिने लक्ष्मण व बायीं ओर शत्रुघ्न चंवर लिए हुए हैं। शेष शैय्या पर भगवान शेष जी लेटे हैं। चरणों में दाहिने हनुमान और बायीं ओर गरूड़ विराजमान हैं। ठीक नीचे रामानुज स्वामी विद्यमान हैं। श्रीरंगनाथ भगवान के विग्रह का प्राणप्रतिष्ठा दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा किया गया। प्राणप्रतिष्ठा महाेत्सव काे कांची प्रतिवादि भयंकर मठ के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज व उनके युवराज बालक स्वामी ने सानिध्यता प्रदान किया। इस माैके पर जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर, जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु स्वामी श्यामनारायणाचार्य, जगद्गुरु स्वामी सूर्यनारायणाचार्य, स्वामी मदनमाेहनाचार्य, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, हनुमानगढ़ी के पुजारी हेमंत दास, महंत वीरेंद्र दास, इंद्रपाल सिंह, प्रियेश दास, महेंद्र त्रिपाठी समेत अन्य उपस्थित रहे।

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