स्वतंत्र लेखन मंच के संस्थापक, संपादक,अध्यक्ष डॉ विनोद वर्मा दुर्गेश “मुकुंद”, मंच की संरक्षिका, संचालिका संयोजिका, अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल “देविका”, कार्यकारिणी व लगभग 50 जागरूक, सजग, आस्थावान रचनाकारों के अविस्मरणीय, अतुलनीय सहयोग से पूर्व घोषित *योग सप्ताह* के अंतर्गत पूरा सप्ताह विभिन्न विषयों और विधाओं में अपनी सशक्त लेखनी व अद्भुत लेखन कौशल से भावाभिव्यक्ति देकर समाज में योग के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया।
दिनांक १७ जून २०२४ से २१ जून २०२४ तक स्वतंत्र लेखन मंच पर योग सप्ताह का आयोजन किया गया। आयोजन की रूपरेखा इस प्रकार थी:
👉दिनांक: १७.०६.२०२४, सोमवार
विषयःयोग और ध्यान,
विधा: गीतात्मक वीडियो प्रस्तुति,
मंच संचालन: आ०किरण भाटिया “नलिनी”जी।
सहभागिता-२० रचनाकार
योग ध्यान का गीत सुनो, जीवन में लो अपनाओ,
स्वास्थ्य का यह राज़ लिए, हर दिन इसे निभाओ।
👉दिनांक: १८.०६.२०२४, मंगलवार
शब्द: योग, विधा: दोहाछंद,
मंच संचालन: आ०सुमन किमोठी “वसुधा”जी।
सहभागिताः२५ रचनाकार
दोहे कहते योग के, मिलता मन आराम,
आसन, प्राणायाम से, योग लगे अभिराम।
👉दिनांक: १९.०६.२०२४, बुधवार,
शब्द: साधना, विधा: मनहरण घनाक्षरी,
मंच संचालन: आ०कमला उनियाल “मृगनयनी”जी।
सहभागिता ः३० रचनाकार
साधना की महिमा है, जीवन अद्भुत सार,
योग ध्यान पथ तेरा, सच्चा उपहार है।
अष्टांग योग मान हो, गुरु सत्कार सम्मान,
साधना मन की शांति, जीवन संचार है।
👉दिनांक: २०.०६.२०२४, वृहस्पतिवार
विषय-जीवन में प्राणायाम का महत्व,
विधा: आलेख।
मंच संचालन: आ०आशा बुटोला “सुप्रसन्ना”जी
सहभागिताः २४ रचनाकार
प्राणायाम पर लिखे, सबने अद्भुत लेख,
श्वास तकनीक है मधुर, स्वस्थ अंग हैं देख|
रक्त संचार बढ़ गया, सुधरा पाचन तंत्र,
मन तनाव को कम करे, उत्तम है ये यंत्र||
👉दिनांक: २१.०६.२०२४, शुक्रवार,
विषय-योग भगाए रोग,योग रखे निरोग,
विधा: छंदमुक्त काव्य
मंच संचालन: आ०नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”जी
सहभागिताः४९ रचनाकार
योग भगाये रोग सब, योग रखता निरोग,
जीवन की ये हर सुबह, भर दे नव संयोग।
सजीव तन-मन को करे, शक्ति नवल संचार,
बाधाएं सब योग से, हो जाती हैं पार।
👉दिनांक: २२.०६.२०२४, शनिवार
विषय: योग सप्ताह पर समीक्षात्मक अभिव्यक्ति, विधा स्वैच्छिक
मंच संचालन: आ०संतोषी किमोठी वशिष्ठ “सहजा” जी
सहभागिताः २१ रचनाकार
अंत में पूरे योग सप्ताह की समीक्षात्मक अभिव्यक्ति ने रचनाकारों को अपने और साथियों की प्रतिभागिता के साथ विषयों का आंकलन करने के लिए एक मंच प्रदान किया| स्वतंत्र लेखन मंच की ऐसी अनूठी पहल वास्तव में अपने अंतस में झाँकने और आत्मविश्लेषण करने का अनोखा प्रयास है|
प्रतिदिन श्रेष्ठ रचनाकारों को विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया।
“विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” के अवसर पर दिनांक: २१.०६.२०२४को एक विशेष आयोजन भी रखा गया था। जिसमें रचनाकारों को *योगाभ्यास करते हुए एक वीडियो* पोस्ट करना था। यह कार्यक्रम को बहुत पसंद किया गया और अपेक्षा से अधिक सफल रहा। इसमें योग/प्राणायाम करते हुए लगभग २५ से ३०रचनाकारों के वीडियो प्राप्त हुए।
इन सभी समर्पित रचनाकारों को “सहज सहयोगी सम्मान”से सम्मानित किया गया।
सप्ताह भर चलने वाले इस आयोजन में कर्तव्यनिष्ठ, कर्म निष्ठ, प्रतिबद्धित, अनुशासित, नियमित ११ रचनाकार अशोक दोशी दिवाकर, सुरेश जोशी सहयोगी,संजीव भटनागर सजग,अरुण ठाकर कवित्त, नीरजा शर्मा अवनि,नीतू रवि गर्ग कमलिनी,डॉ पूर्णिमा पाण्डेय सुधांशु,रंजना बिनानी स्वरागिनी, संगीता चमोली इंदुजा, रेखा पुरोहित तरंगिणी, वीना टंडन पुष्करा
ने प्रतिदिन अपनी भावाभिव्यक्ति विषय व विधानुसार दे कर समाज को योग के प्रति जागरूक
करने का उल्लेखनीय प्रयास किया।
आप सभी की कार्यशीलता को रेखांकित करते हुए
*योग प्रहरी सम्मान* से सम्मानित किया गया।
स्वतंत्र लेखन परिवार के समर्पित,सक्रिय व मंच के प्रति आस्था रखने वाले प्रबुद्ध रचनाकार
नीता कपूर,मोहन प्रसाद यादव साधक, स्वर्ण लता सोन कोकिला, किरण भाटिया नलिनी, डॉ पूनम सिंह सारंगी, सुमन किमोठी वसुधा, सविता मेहरोत्रा सुगंधा, आशा बुटोला सुप्रसन्ना, नंदा बमराडा सलिला, कमला उनियाल मृगनयनी,सुनील कुमार, संतोषी किमोठी वशिष्ठ सहजा,अलका जैन चंचला, बेली राम कनस्वाल, जगत भूषण राज, होशियार सिंह यादव,अंजू श्रीवास्तव, सिद्धि डोभाल सागरिका,नृपेंद्र चतुर्वेदी सागर, माधुरीश्रीवास्तव यामिनी, मंजुला सिन्हा मेघा, कुसुम लता तरुषी, कवि रमाकांत सोनी, सुरेंद्र बिंदल, डॉ वंदना खंडूरी, आचार्य धीरज द्विवेदी, साधना श्रीवास्तव, घनश्याम सिंह कीनिया, सरोज डिमरी,
रजनी बाला, स्वाति जैसलमेरिया, कृष्णा बाघमरे, भूपेंद्र ग़ौर, प्रेम सिंह, देवेन्द्र भ्रमर, शिवशंकर लोध राजपूत, डॉक्टर राम कुमार झा ने उपस्थिति हो कर अपनी भावाभिव्यक्तियों के माध्यम से समाज में योग को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
फूलचंद्र विश्वकर्मा भास्कर की प्रतिबद्धता,सुरेश चंद्र जोशी सहयोगी जी की पैनी नज़र, आदरणीय अशोक दिवाकर जी की त्वरित प्रतिक्रियाएँ,सुनील भारती आज़ाद सौरभ जी के पोस्टरस, नीरजा शर्मा अवनि के सम्मान पत्र, सुमित जोशी राइटर जोश की वीडियोस व कृष्ण कांत मिश्र कमल के अनवरत सहयोग ने आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए चार चाँद लगा दिए।
अंत में कार्यक्रम को अंतिम पायदान की ओर ले जाते हुए मंच अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने
ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी रचनाकारों का दिल से आभार प्रकट करते कहा
योग मात्र प्रदर्शन नहीं, ईश्वर का दर्शन है ।
योग का अर्थ होता है जोड़ना। अर्थात शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में जोड़ना ही योग है।
योग हमारी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व योग के महत्व को समझा और इसे जीवन का आधार बनाया। योग एक प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति है।जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का प्रयास किया जाता है।इन तीनों के स्वस्थ रहने से हम स्वयं को स्वस्थ और प्रसन्नचित्त महसूस करते हैं।
योग के माध्यम से न केवल बीमारियों का निदान किया जाता है बल्कि इसे अपना कर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को दूर भी किया जा सकता है। योग हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ-साथ शरीर में नवीन ऊर्जा का संचार भी करता है। योग शरीर को शक्तिशाली और लचीला बनाता है,साथ ही साथ तनाव दूर कर एकाग्रता भी बढ़ाता है। योग बेशक हल्का व धीमा व्यायाम है लेकिन इसके फायदे उतने ही अधिक हैं।योग करने से हमारे शरीर के सभी अंगों को लाभ पहुंचता है। नियमित योग करने से हम शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूप से स्वस्थ रहते हैं। यदि हर व्यक्ति योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो उसका जीवन संतुलित हो जाएगा।
मंच अध्यक्षा ने जागरुक स्वतंत्र लेखन परिवार से योग को केवल सृजन तक सीमित न रख कर दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाकर स्वस्थ रह कर भविष्य में भी इसी प्रकार आयोजनों को परमात्मा से आशीर्वाद लेकर निर्विघ्न सफल बनाने का आश्वासन लिया।