वैज्ञानिक यज्ञ शोध करें -आचार्य सुरेश जोशी

🌻🌻 ओ३म् 🌻🌻
🌲 वैज्ञानिक यज्ञ शोध करें 🌲
ग्राम गजाधर पुर संत कबीर नगर में चल रहे 🥝 वेद-महोत्सव 🥝 में अग्निहोत्र विज्ञान पर विचार विमर्श हुआ। यदि वैज्ञानिक यज्ञों पर शोध करें और सरकार वैज्ञानिकों को इस हेतु 🪷 अर्थ दान 🪷 करें तो व्यक्ति, परिवार,समाज, राष्ट्र व विश्व को रोग-मुक्त कराया जा सकता है।
वैदिक ऋषियों ने इस विषय अनेकों अनुसंधान किए। जैंसे 🌸 पुत्रेष्टि यज्ञ 🌸 वृष्टि यज्ञ🌸 राजसूय यज्ञ🌸 अश्वमेध यज्ञ 🌸 गो-मेध यज्ञ आदि। यहां तक कि मनुष्य की अंतिम विदाई भी वैदिक काल में यज्ञ से ही होती थी।उस यज्ञ का नाम 🌼 नरमेध यज्ञ 🌼 है। वैदिक धर्मी आर्य समाज में आज भी 🌼 नरमेध यज्ञ 🌼 होता है।
वैदिक ऋषियों ने याज्ञिक शोधों से पता लगाया कि 🔥 दैनिक अग्निहोत्र 🔥 से चार प्रकार के लाभ होते हैं।
[१] वैयक्तिक वायुमंडल एवं सामाजिक वायुमंडल की शुद्धि होती है।
[२] वैयक्तिक रोग और सामाजिक रोगों का शमन होता है।
[३] उत्तम औषधि एवं अन्न की प्राप्ति होती है।
[४] यज्ञ से वृष्टि होकर सृष्टि शस्य श्यामला होती है।
यज्ञ एक पूर्ण वैज्ञानिक विधि है। जिसमें चार प्रकार की सामग्रियां होती है। प्रथम पुष्टिकारक द्वितीय सुगंधि कारक, तृतीय आयुवर्द्धक, चौथी रोगनाशक।इसके साथ यज्ञ केवल 🐂 गो-घृत 🐂 से ही करना चाहिए।समिधा में आम,विल्व, पीपल, आंवला, वरगद,पाकर सर्वोत्तम हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यज्ञ केवल वेद मंत्रों से ही किया जाता है। कुछ लोग रामचरितमानस , हनुमान चालीसा से हवन करते हैं यह वेद- विरुद्ध कार्य है। दुर्भाग्य है कि हमारे राजनेता भी 🌈 वेद -वैदिक संस्कृति 🌈 से अनभिज्ञ है इसीलिए प्रजा भी दिग्भ्रमित हैं।केवल आर्य समाज ही वर्तमान समय 🌸 यज्ञ को पर्यावरण व विज्ञान 🌸 से जोड़कर सम्पूर्ण मानवता को अग्निहोत्र विज्ञान से परिचित करा रहा है। आवश्यकता है जन सामान्य भी इस विषय में रुचि ले तभी संसार यज्ञमय हो सकता है।
लखनऊ से पधारे भजनोपदेशक पं०नेमप्रकाश जी ने वैदिक भजन 🌿 दाता तेरे सुमिरन का वरदान जो मिल जाए। मुरझाईं कली दिल की हर आन में खिल जाए 🌿 सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया।
बाराबंकी से पधारी पंडिता रुक्मिणी देवी वैदिक भजनोपदेशका ने यज्ञ गीत 🍁 सुखमय होवे सब संसार, नर-नारी हवन रचाये 🍁 सभी श्रोताओं ने झूमकर भजनों का अमृतपान पान किया।
🕉️ आचार्य सुरेश जोशी 🕉️

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *