उपासक परमात्मा से पांच संबंध बनाता है- आचार्य सुरेश जोशी

संपन्न हुआ आर्यसमाज गांधीनगर बस्ती का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव

🌼🌼 प्रथम दिवस 🌼🌼
🪷ब्रहयज्ञ व मानवता 🪷
आर्य समाज मंदिर गांधी नगर बस्ती का वार्षिकोत्सव ब्रह्म यज्ञ से प्रारंभ हुआ । ब्रह्म यज्ञ का उद्देश्य मानव में मानवता को जगाना है। प्रत्येक मनुष्य को यह जानना जरूरी है कि जिस संसार में हम जी रहे हैं इसको बनाने वाला और हमको इस संसार में भेजने वाला व हमारे कर्मानुसार 🌴 सुख-दुख व मोक्ष🌴 देने वाला परमात्मा है। यदि हमने उसको नहीं जाना तो हमारे मानव जीवन का लक्ष्य अधूरा समझो।
उस परमात्मा को जानने की जो वैज्ञानिक व वैदिक विधि है उसका नाम है 🔥 ब्रह्मयज्ञ 🔥 बोलचाल की भाषा में इसी ब्रह्मयज्ञ को 🌲 संध्या 🌲भी कहते हैं।
अर्थात् ** सन्ध्यायन्ति सन्ध्यायते वा पर ब्रह्म यस्यां सा सन्ध्या** यानि कि भली भांति ध्यान करते हैं वा ध्यान किया जाय जिसमें वह संध्या है। संध्या के तीन क्रम है।
🌸🌸 शारीरिक 🌸🌸
शौच, स्नान, शुद्ध व शांत वातावरण में आसन लगाकर बैठना।
🌸🌸 वाचिक 🌸🌸
संध्या मंत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करना ।
🌸🌸 मानसिक 🌸🌸
सर्वोत्तम पुरुषार्थ करना अर्थात मंत्रों का पाठ अर्थ सहित करना।उस अर्थ को व्यावहारिक जीवन में उतार कर आनंदित होना और अन्य लोगों को भी प्रेरित करना।
इस प्रकार जो प्रतिदिन सुबह -शाम एकांत में बैठकर ईश्वर का ध्यान करते हैं उस मानव में मानवता जाग जाती है।ऐसा मनुष्य जातिवाद,छूआ -छूत,वर्ग, सम्प्रदाय,मत पंथों से उठकर प्राणि मात्र से निस्स्वार्थ प्रेम करने लगता है। अहिंसा,सत्य, अस्तेय अपरिग्रह तथा ब्रह्मचर्य से युक्त होकर 🍁 शौच🍁 संतोष 🍁तप🍁 स्वाध्याय 🍁 ईश्वर प्राणिधान करके अपने मानव जीवन को सफल कर लेता है।
🏵️ वैदिक अग्निहोत्र 🏵️
कार्यक्रम का प्रारंभ देव यज्ञ से हुआ। प्रमुख यजमान थे!
🌹प्रथम सत्र के यजमान 🌹
[१] श्रीमती मंजू/श्री अरुण जी।
[२]श्रीमती मिथलेश/रोहित जी।
[३] श्रीमती आशा/केवलमानजी
[४] श्रीमती किरण शुक्ला।
[५] श्रीयुत वैभव शुक्ल।
[६] श्री आदित्य दूबे।
[७] श्री उपेन्द्र शर्मा।
[८] सुश्री महिमा।सुश्री सोनी।
इस अवसर पर श्रीयुत सत्येन्द्र वर्मा जी व पंडिता रुक्मिणी जोशी 🥝 वैदिक भजनोपदेशिका 🥝 ने ईश्वर भक्ति के भजनों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया।
🌸 विशिष्ट सहयोगी जन 🌸
श्रीमान वेद कुमार (वेद बाबू जी) श्री बृज किशोर जी। प्रधान श्री मुरली धर भारती जी। मंत्री श्री राधेश्याम जी। संतोष जी महादेवा। श्रीमान कौशल जी महाराज गंज।
🌻 कार्यक्रम संचालन 🌻
कार्यक्रम का संचालन जिला आर्य प्रतिनिधि सभा बस्ती के उप -प्रधान श्री सत्येन्द्र जी वर्मा ने किया।
आचार्य सुरेश जोशी
🌼 वैदिक प्रवक्ता 🌼
🔴🔴 द्वितीय दिवस 🔴🔴
🥝 तीन तरह के मनुष्य 🥝
आर्य समाज मंदिर गांधी नगर बस्ती के १०५ वें वार्षिकोत्सव पर देव यज्ञ की व्याख्या में 🧘 तीन प्रकार 🧘 के मनुष्यों की चर्चा की गई।
🏵️ प्रथम-ऋषि कोटि 🏵️
ऋषि कोटि में वो मानव आते हैं जो स्वार्थ रहित होकर सबके लिए काम करें और स्वयं का कुछ भी प्रयोजन न हो।
🏵️ द्वितीय -मानव कोटि 🏵️
मनुष्य उसे कहते हैं जो अन्यों की भलाई के साथ स्वयं का भी स्वार्थ सिद्ध करता हो, अर्थात् मैं भी सुखी रहूं और भी सुखी रहें।
🏵️ तृतीय -राक्षस कोटि 🏵️
वह मानव जो जो केवल अपना भला सोचें।दूसरे की हानि-लाभ का विचार ही न करें।
पहला मानव उत्तम,दूसरा मध्यम ,तीसरा अधम कहलाता है।उत्तम वो ही मनुष्य बनते हैं जो यज्ञ करते हैं। इसलिए हर मानव को यज्ञ करते हुए ऋषि बनना है तभी ऋषि ऋण से उऋण हो सकेंगे।
वैदिक भजनों की श्रृंखला में पंडित नेम प्रकाश जी आधुनिक अर्जुन व पंडिता रुक्मिणी जोशी वैदिक भजनोपदेशिका बाराबंकी द्वारा भजन व उपदेश दिया गया।
🌼 आज के प्रतिष्ठित यजमान
[१] श्रीमती सुनीता मेंहदीरत्ता।
श्रीमान वेद बाबू जी।
[२] श्रीमती चंद्रकला दूबे।
श्रीमान गिरजा शंकर दूबे
प्रधान आर्य समाज लालगंज।
[३] श्रीमती सरिता मोदनवाल।
श्रीमान आशुतोष मोदनवाल।
[४] श्रीमती कलावती जी।
श्रीमान सुरेन्द्र शर्मा जी।
[५] श्रीमती ऋचा मेंहदीरत्ता।
[६] श्रीमान उपेन्द्र शर्मा जी।
🍁🍁 बाल यजमान 🍁🍁
ब्रह्मचारिणी वेदांशी मेंहदीरत्ता।
आचार्य सुरेश जोशी
वैदिक प्रवक्ता 🌻
🦚🦚 तृतीय दिवस 🦚🦚
🕉️ भक्ति क्या है? 🕉️
आर्य समाज मंदिर गांधी नगर बस्ती के १०५ वें वार्षिकोत्सव के तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में देव यज्ञ के साथ वैदिक सत्संग में आज 🌻 ईश्वर भक्ति 🌻क्या है इस विषय पर वैदिक दृष्टिकोण स्पष्ट किया गया।
लोग भक्ति का अर्थ प्रायः कीर्तन, भजन गाना। तीर्थों में स्नान, पूजा-पाठ करना समझते हैं। वास्तव में भक्ति का इस कर्मकांड से कोई संबंध नहीं है।
भक्ति 🍁 भज् सेवायाम् 🍁 इस धातु से बना है।इसका अर्थ है ईश्वर की सेवा यानि उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही वास्तव में 🌸ईश्वर भक्ति 🌸 कहलाता है।
जो परमात्मा 🌴 सर्वत्र 🌴 है उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,चर्च में 🌴 एकत्र 🌴 करना असंभव है। जो ईश्वर आजाद है उसे कमरे में रखकर गुलाम बनाना संभव नहीं है।जो सबका बाप है उसका बाप मनुष्य कैसे हो सकता है!जो सबको प्राणवान बनाता उसमें प्राण कौन डाल सकता है? अर्थात् कोई नहीं।
वर्तमान में भक्ति पांच प्रकार से हो रही है।
🌼🌼 स्वार्थ भक्ति 🌼🌼
इस भक्ति के तीन भेद हैं।
(१) अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए किसी पशु -पक्षियों की बलि देना।इसे बलि प्रथा कहते हैं।
(२) आडंबर।किसी भक्त को मंदिर में आते देखकर पुजारी का आंख बंद करके ध्यान लगाने की आदत।इसे बगुला भक्ति कहते हैं।
(३) व्यापार बढ़ाने के लिए अगरबत्ती घुमाकर चारों ओर घुमाना। फिर पैंसे को पिटारी में घुमाकर है।माता टेककर पेंटी में डालना।ये प्रदर्शन है।
🌼🌼 परमार्थ भक्ति 🌼🌼
परोपकार,सेवा से समाज सेवा करना। परहित जीना। परहित मरना। जिसमें ये गुण हों जाते हैं वो योगी बन जाते हैं।
🌼🌼 आंतरिक भक्ति 🌼🌼
हृदय की प्रेरणा सुनकर ईश्वर के ध्यान में बैठने के लिए पुरुषार्थ करना इसमें तीन चीजें स्वयं होने लगती हैं।तप, ज्ञान व तितीक्षा
🌼🌼 संबंधित भक्ति 🌼🌼
इसमें उपासक परमात्मा से पांच संबंध बनाता है।
(१) ईश्वर माता है।(२) ईश्वर पिता है।(३) ईश्वर आचार्य है।(४) ईश्वर हमारा राजा है।(५) ईश्वर व्यापक व हम व्याप्य हैं।
🌼🌼 वैदिक भक्ति 🌼🌼
अपनी सकल उत्तम सामग्री यानि शुद्ध शरीर, शुद्ध मन, शुद्ध बुद्धि द्वारा विशेष भक्ति। जिसमें पंचमहायज्ञ,व अष्टांग योग आता है।यही ईश्वर की सेवा यानि आज्ञा है। महाभारत काल तक संपूर्ण विश्व में यही भक्ति की एक मात्र पद्यति थी।
अतः ईश्वर के गुणों का ध्यान कर।उसे समझकर उस पर आचरण करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
कार्यक्रम में प० नेम प्रकाश त्रिपाठी आधुनिक अर्जुन लखनऊ व पंडिता रुक्मिणी जोशी वैदिक भजनोपदेशिका बाराबंकी ने ईश्वर भक्ति के सुमधुर वैदिक भजन सुनाकर भक्ति रस का पान कराया।
🌸🌸 प्रतिष्ठित याज्ञिक🌸🌸
[१] श्रीमती सीमा
श्रीमान शिवम्।
[२] श्रीमती संगीता
श्रीमान गणेश।
[३] श्रीमती उमा
श्रीमान सत्येन्द्र वर्मा।
[४] श्रीमती अन्नू।
श्रीमान संतोष महादेवा
[५] माता सुमन जी।
वैदिक उपासना स्थल
आवास विकास परिषद।
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आचार्य सुरेश जोशी
🍁 वैदिक प्रवक्ता 🍁

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