शिवरात्रि आदियोगी सच्चे शिव को पहचानने का महापर्व है-ओम प्रकाश आर्य

बस्ती 8 मार्च जिला आर्य उप प्रतिनिधि सभा बस्ती के तत्त्वावधान में जिले भर में महाशिवरात्रि का पर्व ऋषि बोध पर्व के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर जिले के प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने नई बाजार में यज्ञ के दौरान बताया कि गुजरात के टंकारा ग्राम में आज के शिवरात्रि के दिन ही दशकों पूर्व एक घटना घटी, एक छोटे से बालक मूलशंकर ने भी शिव भगवान के दर्शन की उत्कंठा से पूरे दिन शिवरात्रि का व्रत धारण किया और भगवान शिव के साक्षात दर्शन की लालसा में पूरी रात भर जागता रहा, मूर्ति का दर्शन तो उसे भी हो गया लेकिन वहां मूर्ति पर एक चूहे को देखकर यह धारणा हुई की यह सच्चे भगवान शिव नहीं हो सकते ! इसी घटना ने बालक मूलशंकर को झकझोर कर रख दिया, उसे शिवरात्रि को बोध हुआ, उसके ज्ञान चक्षु खुल गए ! इसी घटना को लेकर सच्चे शिव के साक्षात दर्शन करने की चाह में बालक मूलशंकर ने छोटी सी आयु में घर छोड़ दिया, वे भटकते हुए साधु बने, संन्यासी बने, योगी बने, एक लम्बी भ्रमण यात्रा करते हुए निकल पड़े कैलाश पर्वत की ओर ! आगे चलकर उस बालक ने संसार को अपनी प्राचीन आर्य संस्कृति और सभ्यता की सनातन वैदिक दिशा का दिग्दर्शन कराते हुए वह बालक महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम से समस्त विश्व में प्रसिद्ध हुए । उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि अपने भीतर शिवत्व को जगाने का महापर्व है। योग को जगाने व योगमय जीवन बनाने का पर्व है। इस पावन पर्व पर हमें शिव बनकर राष्ट्र रक्षा का व्रत लेना चाहिए ताकि हम देश और समाज का उत्थान करते हुए शिवत्व को प्राप्त कर सकते हैं।
इसी कड़ी में आर्य समाज गांधी नगर बस्ती के तत्वावधान में श्री भद्रेश्वर नाथ मंदिर के पश्चिमी तरफ एक भव्य शिविर आयोजित कर देव यज्ञ भजन प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें पं0हरिहर मुनि के पौरोहित्य में ब्रह्म यज्ञ व देव यज्ञ क्रम वार सम्पन्न कराया गया। शिव रात्रि मेला में आर्य जगत के प्रसिद्ध भजनोपदेशक श्री राम मगन जी सुल्तानपुर व स्थानीय भजनोपदेशक श्री सत्येन्द्र वर्मा द्वारा भजन के माध्यम से मेले में आए सभी सज्जनों को अमूल्य वैदिक विचार दिए गए। इस अवसर जिला सभा के मंत्री हरिहर मुनि वानप्रस्थी ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यूँ तो महाशिवरात्रि पर्व आदियोगी भगवान शिव के विवाह दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय जनमानस भगवान शिव को एक संहारक शक्ति के रूप में जनता है पर भारत के एक ऋषि महर्षि दयानंद सरस्वती ने जब विद्वानों से जब सच्चे शिव के स्वरूप के बारे में पूछा तो वो बगलें झांकने लगे। आर्य समाज इस दिवस को ऋषि बोध उत्सव के रूप में मनाता है। सत्येन्द्र वर्मा ने अपने भजनोपदेश के माध्यम से ईश्वर के सच्चे स्वरूप को पाने का सरलतम मार्ग बताया और कहा की आर्य समाज हिन्दू समाज का प्राण है और समय समय पर उसमें वेदों की शिक्षाओं का प्रकाश करता रहता है जिससे आम जनमानस को कुरीतियों, अन्धविश्वास और पाखण्ड के बहकावे से बचाया जा सके। ज्ञात हो कि इस अवसर पर जिले की आर्य समाज मंदिरों में वैदिक यज्ञ कर आमजनमानस को शिव के सच्चे स्वरूप के बारे में समझाने के लिए विद्वानों प्रवचनों का आयोजन किया जाता रहा है। कार्यक्रम प्रातः 8 बजे से सायं 4 बजे तक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आर्य समाज गांधी नगर बस्ती के प्रधान श्री मुरलीधर भारती, मंत्री श्री राधेश्याम सिंह,उप मंत्री श्री सत्येन्द्र वर्मा,श्री वेद कुमार, गरुण ध्वज पाण्डेय, शिव श्याम, अलख निरंजन आर्य, आदि सपरिवार उपस्थित रहे।

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