अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी एक सीमा होनी चाहिए, बॉम्बे हाईकोर्ट

अनुराग लक्ष्य, 28 दिसंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुंबई संवाददाता ।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बोलने और सोवतंत्रा की अभिव्यक्ति को लेकर बड़ी बात कह दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि बोलने आजादी और अभिव्यक्ति की स्व तंत्रा को दायरे से बाहर जाकर नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा होता है तो इसके नतीजे में लोगों को दोषी ठहराया जा सकता है और परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
न्याय मूर्ति एकल जाघव की एकल पीठ ने ऑटो पार्ट्स निर्माण कंपनी हिताची के एक कर्मचारी की सेवा समाप्त करने को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी कही।
बताते चलें कि कर्मचारी ने कंपनी के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी , जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में लोगों के खिलाफ एक कड़ा संदेश देने की ज़रूरत है। इस बारे में अदालत ने आगे कहा कि इस तरह के कारगुजारियों को खत्म करने की आवश्यकता है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि किसी को ऐसी हरकत को करने की आजादी अदालत की तरफ से बिलकुल नहीं मिल सकती। अगर अदालत ऐसे मामलों को नज़र अंदाज़ करेगी तो इसके नतीजे भविष्य में दुर्भाग्य पूर्ण हो सकते हैं।

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