

अनूराग लक्ष्य, 24 दिसंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
त्वारीख शाहिद है इतिहास साक्षी है कि जब जब कोई देश, राज्य, शहर या कस्बा उजड़ता है तो पल भर में उसकी पूरी दुनिया उजड़ जाती है और पीछे छोड़ जाता है भुखमरी और तबाही का कभी न खत्म होने वाला मंज़र।
बारह लाख आबादी वाली धारावी भी इस वक्त कुछ इसी कश्मकश के दौर से गुज़र रही है, जिसे धारावी में रहने वाले हर शख्स के चेहरे पर साफ तौर पर दिखाई देने लग गया है।
जैसा कि सुनने में आ रहा है, और साथ ही जगह जगह धारावी बचाओ आंदोलन की मुहिम जो छिड़ गई है। उससे तो यही लग रहा है कि आने वाला समय धारावी वासियों के लिए एक बड़ा संकट लेकर आने वाला है।
अगर ऐसा हुआ तो कितने घर उजड़ेंगे , कितने आशियाने बर्बाद होंगे और साथ ही कितने उद्योग धंधे जो कारखानों की शक्ल में यहां हर घर में चल रहे हैं। सब तबाह हो जायेंगे। वैसे तो आए दिन राजनैतिक और तमाम समाज सेवी संस्थाएं धरावी के अस्तित्व को बचाने की मुहिम में अपनी अपनी भूमिकाएं निभा रहे हैं, लेकिन अटकलें हैं जो थामने का नाम नहीं ले रही हैं।
इस संकट के गहरे और काले बादल से कैसे धारावी की जनता को बचाया जाए, इसका कोई सटीक समाधान अभी तक तो नजर नहीं आ रहा है। इसलिए मजबूरन यह कहना पड़ रहा है कि करोड़ों रुपए का कारोबार करने वाली धारावी का क्या होगा।