अनुराग लक्ष्य, 23 नवंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुंबई संवाददाता ।
मुंबई की सरजमीन पर आप जिस तरफ नज़र डालेंगे, आपको गोशें गोशे में बुजुरगान ए दीन के मजारात का एक अजीब की खुशनुमा मंजर देखने को मिलेगा । अगर एक तरफ शहंशाह ए मुंबई हजरत ए हाजी अली अपनी तमाम करामात से आवाम को अपना फैजान पहुंचा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ सरकार ए माहिम हजरत ए कुतुब मखदूम माहिमी अपनी तमाम तर खूबियों और जलवों के साथ जलवा अफ़रोज़ हैं।
अगर मुम्बई पश्चिम की बात करें तो बॉम्बे सेंट्रल में हजरत ए बहाउद्दीन शाह रहमतुल्लाह और डोंगरी में सैय्यद हाजी अब्दुर्रहमान शाह कादरी अपनी आन बान और शान के साथ पूरी मुंबई की सरजमीन को मुहब्बत और इंसानियत का पैगाम देते नज़र आ रहे हैं।
इसी फेहरिस्त में धरावी की धड़कन, शहंशाह ए धारावी हजरत ए पीर मौला अली शाह का अपना अलग ही रंग है। जिनका फैजान हर ख़ास ओ आम तक हमेशा पहुंचता रहा है। हर साल की तरह इस साल भी आस्ताना ए पीर मौला अली शाह पर उनका 67 वां उर्स मुबारक शुरु हो चुका है जो 26 नवंबर तक चलेगा। जिसमें उनके मुरीदैन और चाहने वाले अपनी अपनी अकीदतों के साथ रोज़ अपनी अकीदत के फूल और नज़राने पेश कर रहे हैं। छब्बीस नवंबर तक चलने वाले इस प्रोग्राम में नात, तकरीरी जलसे के साथ कव्वाली का खास प्रोग्राम चलेगा।धरावी की जनता दरबार ए पीर मौला अली शाह के आस्ताने पर पूरे जोश ओ खरोश के साथ इस विशाल आयोजन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया करती है। कमेटी दरगाह इस मौके पर अपने जायरीनों का दिल खोलकर उनका खैर मकदम करती है, साथ धरावी की पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहती है जिससे कार्यक्रम में कोई अनदेखी घटना न घट सके।