दिसंबर में बस्ती में होगी बागेश्वर धाम की कथा, तिथि की आधिकारिक घोषणा जल्द: मनीष मिश्रा
जनपद के नागरिकों से आर्थिक सहयोग नहीं, केवल साथ और आशीर्वाद की अपील
कांग्रेस नेता के सोशल मीडिया पोस्ट पर बोले मनीष मिश्रा, लीगल टीम भेजेगी नोटिस, मानहानि का मुकदमा भी कराएंगे दर्ज
लवकुश सिंह संवाददाता
अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती
बस्ती। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की कथा दिसंबर माह में बस्ती में आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम की तिथि की आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस आयोजन के लिए बस्ती जनपद के किसी भी नागरिक से एक रुपये का भी आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाएगा। हमें केवल जनता का साथ, सहयोग और आशीर्वाद चाहिए। उक्त बातें पहल संस्था के संस्थापक मनीष मिश्रा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं।
मनीष मिश्रा ने कहा कि पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से उनका संबंध वर्ष 2020 से है और दोनों के बीच भाई जैसा रिश्ता है। उन्होंने कहा कि बस्ती में प्रस्तावित कथा को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आयोजन के लिए जनपद के किसी भी नागरिक पर आर्थिक सहयोग देने का दबाव नहीं होगा। कथा की तिथि और अन्य आवश्यक जानकारियां आधिकारिक घोषणा के माध्यम से साझा की जाएंगी।
बस्ती के भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सूर्य के संबंध में पूछे गए सवाल पर मनीष मिश्रा ने कहा कि उनके सामने वह स्वयं को एक मामूली सा तारा मानते हैं। उन्होंने अपनी पहचान भाजपा के छोटे से कार्यकर्ता के रूप में बताते हुए कहा कि उन्होंने विवेकानंद सूर्य को कई बार प्रणाम किया, लेकिन उनके अनुसार उन्होंने उनका प्रणाम स्वीकार नहीं किया। उनके इस बयान को स्थानीय राजनीतिक हलकों में संगठन के भीतर आपसी संवाद और संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
एक अन्य सवाल के जवाब में मनीष मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के एक नेता की ओर से सोशल मीडिया पर उन्हें जेल भेजने संबंधी पोस्ट साझा किए जाने के मामले को उनकी लीगल टीम गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम जल्द ही संबंधित नेता को नोटिस भेजेगी और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
मनीष मिश्रा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी के विरुद्ध निराधार आरोप नहीं लगाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह इस मामले में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिससे भविष्य में कोई भी कांग्रेसी किसी भाजपा कार्यकर्ता के खिलाफ निराधार आरोप लगाने से पहले सोचे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में बयानबाजी के दौरान तथ्यों और मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। अब इस मामले में उनकी ओर से प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई और दिसंबर में होने वाली कथा की आधिकारिक तिथि की घोषणा पर लोगों की नजरें रहेंगी।