महापौर ने मासिक बजट तीन गुना करने और धार्मिक आयोजनों के लिए अलग से बजट देने की रखी बात
महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए नगर निगम का मासिक बजट तीन गुना बढ़ाया जाना चाहिए। यह मांग अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने लखनऊ के ताज होटल में आयोजित छठवें राज्य वित्त आयोग की समिति की बैठक के दौरान रखी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की गरिमामयी मौजूदगी में महापौर ने नगर निगम की वित्तीय स्थिति और बढ़ती जरूरतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु व सुझाव प्रस्तुत किए। महापौर ने कहा कि विरासत के साथ विकास के मॉडल के रूप में उभर रही अयोध्या आज भारतीय पुनर्जागरण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रतीक है। पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार 10 से 20 लाख आबादी की श्रेणी में होने के बावजूद, अयोध्या को उसकी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से अधिक होने से अवस्थापना व्यय बढ़ा है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मासिक आवंटन समान श्रेणी के अन्य नगर निगमों की तुलना में महज एक-तिहाई है। रोजाना एक लाख श्रद्धालुओं का आवागमन, मेलों पर विशेष प्रबंधमहापौर ने आयोग को अवगत कराया कि अयोध्या में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालु और सालाना चार करोड़ से अधिक पर्यटक आते हैं। मकर संक्रांति, वसंत पंचमी, चैत्र रामनवमी, सावन झूला, दीपोत्सव, परिक्रमाओं और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख मेलों के दौरान एक ही दिन में 40 से 50 लाख श्रद्धालु तक पहुंचते हैं। इतनी विशाल जनसंख्या को सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट व नागरिक सुविधाएं देना सीमित बजट में एक बड़ी चुनौती है। इसलिए आयोग द्वारा प्रमुख धार्मिक आयोजनों और मेलों के लिए अलग से विशेष धनराशि स्वीकृत की जानी चाहिए।
एसटीपी के रखरखाव और नगरीय सुविधाओं हेतु अतिरिक्त फंन नगर की जरूरतों को रेखांकित करते हुए महापौर ने बताया कि वर्तमान में शहर में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं, जिनके वार्षिक अनुरक्षण पर जल निगम के माध्यम से लगभग 13.75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। अनुरक्षण अवधि समाप्त होने के बाद यह वित्तीय भार नगर निगम पर आएगा, जिसके लिए राज्य वित्त आयोग को अलग से वित्तीय प्रावधान करना चाहिए। साथ ही, स्वच्छता अभियानों तथा कचरा प्रबंधन वाहनों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त बजट की मांग की गई। तीन वर्षों में 55.96 करोड़ से बढ़कर 70.53 करोड़ हुई निगम की आय नगर निगम की आत्मनिर्भरता के प्रयासों का ब्योरा देते हुए महापौर ने बताया कि वित्तीय सुधारों के कारण निगम की आय में निरंतर वृद्धि हुई है।