अयोध्या में भव्य समारोह जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य को मिलेगा ‘विशिष्ट सम्मान’, ब्रिजनन्दन ब्रह्मचारी सम्मान से ‘दि आयुष्मान फाउंडेशन’ सम्मानित

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। पंडित उमापति त्रिपाठी की कीर्ति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके योगदान को स्मरण करने के लिए इस वर्ष के ‘विशिष्ट सम्मान’ की घोषणा कर दी गई है। यह प्रतिष्ठित सम्मान इस बार जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य ‘विद्या भास्कर’ जी महाराज को प्रदान किया जाएगा। वहीं, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा ब्रिजनन्दन ब्रह्मचारी के नाम पर दिया जाने वाला ‘ब्रिजनन्दन ब्रह्मचारी सम्मान’ ‘दि आयुष्मान फाउंडेशन’ को सम्मानित करने के लिए तय किया गया है। रामकथा पार्क में होगा भव्य आयोजन वशिष्ठ फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इस सम्मान समारोह का आयोजन आगामी 4 अक्टूबर को दोपहर 03:00 बजे रामकथा पार्क में किया जाएगा। इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक होंगे। समारोह के दौरान प्रसिद्ध कलाकार रूपेश मिश्र द्वारा भजन संध्या की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। सनातन संस्कृति और साहित्य में पंडित उमापति त्रिपाठी का योगदान महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पूज्य पंडित उमापति त्रिपाठी का सनातन संस्कृति के उत्थान में अतुलनीय और अविस्मरणय योगदान रहा है। उन्होंने संस्कृति एवं हिंदी में ‘कोविद’ नाम से कई विशिष्ट रचनाएं कीं, जिनके केंद्र में दर्शन, अध्यात्म और रसोपसना रही है। विद्वानों के अनुसार, उनकी लगभग 50 रचनाओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें प्रभु श्रीराम को राजकुमार के रूप में अपना शिष्य, मित्र और सभासद मानने के भाव को दर्शाया गया है।
पूर्व में इन प्रतिष्ठित हस्तियों को मिल चुका है सम्मान यह पुरस्कार इससे पहले अयोध्या के ख्यात प्राप्त विद्वान पंडित विदेश प्रसाद शुक्ल ब्रह्मचारी जी को दिया जा चुका है। इसके अलावा प्रख्यात विद्वान ब्रह्मानंद पाठक, महंत नृत्यगोपाल दास और राजगोपाल मंदिर के महंत फलाहारी जी को भी यह गौरव प्राप्त हो चुका है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ब्रिजनन्दन ब्रह्मचारी का स्मरण क्रांतिकारी ब्रिजनन्दन ब्रह्मचारी मूल रूप से सिद्धार्थनगर जनपद के डँडवाघाट के रहने वाले थे और विद्याध्ययन के लिए अयोध्या आए थे। उन्होंने श्री तिवारी मंदिर में रहकर संस्कृत की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1923 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट आर्मी की अयोध्या में बैठक आयोजित करने में उनकी अहम भूमिका रही और वे महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के अभिन्न सहयोगी रहे। 1929 में वे दिल्ली सेंट्रल जेल में महामना के साथ भी रहे। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान इससे पूर्व श्रीराम अवध अंध विद्यालय, दूरदर्शन लखनऊ के आत्म प्रकाश, गौरीशंकर गवैया और डॉ. चैतन्य जैसी कई महान हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है।