मेंहदावल की पावन धरती पर साहित्य का एक अनमोल रत्न राजेंद्र बहादुर सिंह,,,,,,,,

अनुराग लक्ष्य, 3 अक्टूबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
साहित्य ने हमेशा समाज में एकजुटता भाई चारा और समानता स्थापित करने के साथ साथ इंसानियत की शमाँ को रोशन किया है। इस फेहरिस्त में में मेंहदावल की धरती पर एक नाम हुआ करता था, “” साहित्य संगम ” के संस्थापक अलख निरंजन पथिक जी का ।
शुक्र है कि आज की तारीख़ में मेंहदावल की धरती पर एक नाम उभरा । दुनिया ए अदब जिन्हें राजेंद्र बहादुर सिंह के नाम से जानती और पहचानती है।
राजेंद्र बहादुर सिंह जी एक शसक्त कवि के साथ एक खूबसूरत दिल के मालिक भी हैं। साहित्यिक मंचों पर उनके काव्यपाठ से श्रोता मंत्र मुग्ध हो जाते हैं। उनकी ग़ज़लों में हिंदुस्तानी तहज़ीब की खुशबू रची बसी है।
मेंहदवाल की धरती से निकलकर अब उनकी पहचान प्रदेश के अन्य ज़िलों तक भी पहुंच रही है। जो उनकी असाधारण साहित्यिक प्रतिभा को दर्शाता है।
पेशकश, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी