नाबालिग से यौन अपराध के मामले में अभियुक्त को 20 वर्ष का कठोर कारावास

नाबालिग से यौन अपराध के मामले में अभियुक्त को 20 वर्ष का कठोर कारावास

बहराइच। नाबालिग से यौन अपराध के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो ने अभियुक्त आलोक पुत्र श्रीकान्त चौहान को दोषसिद्ध करते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट, भादवि की धारा 504 और 506 के तहत सजा सुनाई।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 में वादी ने थाना दरगाह शरीफ में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय बहन को बहला-फुसलाकर उसके साथ जबरन यौन अपराध किया गया तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में थाना दरगाह शरीफ में मुकदमा अपराध संख्या 181/2022 के तहत धारा 376, 506 एवं 120बी भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया था।

विवेचना के दौरान साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक राजेश्वर सिंह ने अभियुक्त के विरुद्ध धारा 376, 504, 506 भादवि तथा धारा 5(जे)(ii)/6 पॉक्सो एक्ट में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में न्यायालय द्वारा 25 सितंबर 2024 को आरोप निर्धारित किए गए।

पुलिस के मुताबिक घटना के समय अभियुक्त बालक था। प्रथम अपर सत्र न्यायालय के आदेश के बाद प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया। किशोर न्याय बोर्ड ने अपराध को जघन्य श्रेणी का मानते हुए प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद 3 सितंबर 2024 को प्रकरण बाल न्यायालय को संदर्भित किया। बाल न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध किया।

21 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹50 हजार अर्थदंड, धारा 504 भादवि में दो वर्ष का कारावास एवं ₹2 हजार अर्थदंड तथा धारा 506 भादवि में तीन वर्ष का कारावास एवं ₹2 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है। पुलिस ने बताया कि अभियुक्त घटना के समय बालक था, इसलिए सजा का निष्पादन किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के लागू प्रावधानों के अधीन होगा।

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताई गई है। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह, संतोष कुमार सिंह, मॉनीटरिंग सेल, थाना दरगाह शरीफ पुलिस, कोर्ट मोहर्रिर कांस्टेबल बृजेश कुमार साहनी एवं थाना पैरोकार कांस्टेबल महेन्द्र सोनकर ने प्रभावी पैरवी की।