डा परमानन्द श्रीवास्तव की स्मृति में स्थापित पहला ‘परमानन्द श्रीवास्तव आलोचना सम्मान’ सुप्रसिद्ध आलोचक, कवि एवं अनुवादक रघुवंश मणि को प्रदान किया जाएगा।

बस्ती,11 सितम्बर 2026। हिन्दी साहित्य के जाने माने आलोचक एवं कवि डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की स्मृति में स्थापित पहला ‘परमानन्द श्रीवास्तव आलोचना सम्मान’ सुप्रसिद्ध आलोचक, कवि एवं अनुवादक रघुवंश मणि को प्रदान किया जाएगा।

डॉ परमानंद

यह सम्मान परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति न्यास एवं साखी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘परमानन्द श्रीवास्तव अवदान और महत्व’ (19, 20 सितम्बर) के उद्घाटन सत्र में प्रदान किया जाएगा। रघुवंश मणि को यह सम्मान डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की धर्मपत्नी ज्ञानवती श्रीवास्तव एवं प्रख्यात आलोचक शम्भुनाथ द्वारा अर्पित किया जाएगा। सम्मान स्वरूप रू0 11,000 की धनराशि और प्रशस्ति-पत्र भेंट किया जाएगा।
चयन समिति ने रघुवंश मणि के आलोचनात्मक अवदान को रेखांकित करते हुए अपनी संस्तुति में कहा कि ”3 जून 1964 को लखनऊ में जन्मे और फैजाबाद (अयोध्या) निवासी रघुवंशमणि ने डब्ल्यू. बी. यीट्स पर अपना शोध कार्य सम्पन्न किया। वे शिवहर्ष किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लम्बे समय तक अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे हैं। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार है, जिसका रचनात्मक उपयोग वे अपने आलोचना-कर्म में निरंतर करते रहे हैं। उनके लिए भाषा और विचार किसी भौगोलिक सीमा में आबद्ध नहीं हैं वे एक सच्चे अर्थों में वैश्विक नागरिक और लेखक हैं।
आलोचना के साथ-साथ उन्होंने वैश्विक वैचारिकी को हिन्दी जगत में सुलभ कराने का महती कार्य किया है। उन्होंने थियोडोर एडोर्नो, जुर्गन हेबरमास, फ्रेडरिक जेमसन, मिशेल फूको और एडवर्ड सईद जैसे विश्वविख्यात विचारकों के लेखों का प्रामाणिक अनुवाद किया है। कविता और आलोचना के इस दोहरे दायित्व का वे अत्यंत निष्ठा और गंभीरता से निर्वाह कर रहे हैं।”
यह जानकारी मिलने पर बस्ती के साहित्यकारों एवं कवियों ने प्रसन्नता व्यक्त किया। जिनमें वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डा0 रामनरेश सिंह ‘मंजूल’, विनोद कुमार उपाध्याय, अजीत कुमार श्रीवास्तव ‘राज’, कुलदीप नाथ शुक्ल, राजेन्द्र सिंह ‘राही, आशीष कुमार श्रीवास्तव, डा0 परमात्मा नाथ द्विवेदी, सलीम बस्तवी अजीजी, दीपक सिंह प्रेमी, शिवाकान्त, डा0 अनिल पाण्डेय, हरिकेश प्रजापति, श्याम प्रकाश शर्मा आदि शामिल रहे।
रघुवंश मणि की प्रमुख कृतियाँ-निर्वचन (आलोचना), समय में हस्तक्षेप (वैश्विक विचारकों के लेखों का अनुवाद), हरा रंग केन्द्रीय रंग नहीं है (कविता संग्रह), हवा के पखेरू (कविता संग्रह शीघ्र प्रकाश्य)