अनुराग लक्ष्य, 11 सितंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
मुंबई के कवि सम्मेलन और मुशायरे में मेरे साथ बराबर शिरकत करने वाले शायर इमरान गोंडवी किसी तअर्रुफ के मोहताज नहीं हैं। एक कोहना मश्क शायर के साथ एक खूबसूरत शख्सियत के भी मालिक हैं।आज ऐसे संजीदा शायर के कुछ अशआर आप तक पहुंचा रहा हूँ। दुनिया ए अदब जिन्हें मोहतरम इमरान गोंडवी के नाम से जानती और पहचानती है।
1 / आसमान ए अर्श पर यूँ जगमगाई कर्बला,
करबलाई हो गई सारी खुदाई कर्बला ।
2 / दास्तान ए चश्म ए तर की है यही इतना सबब,
आ गया माह ए मोहर्रम याद आयी कर्बला ।
3 / किस को तेरी मार्फत , किसको तेरा इरफान है,
जो करे अज़मत पे तेरी लब कुशाई कर्बला ।
4 / जान ए अहमद, जान ए ज़ोहरा है तेरी आग़ोश में,
कम कभी होगी न तेरी पारसाई कर्बला ।
5 / जो भी आता है अकीदत से यहाँ उस शख्स की,
करते हैं मुश्किल कुशा मुश्किल कुशाई कर्बला ।
6 / तुझपे नंगे पांव चलते हैं सलातीन ए जहाँ,
तूने तो क्या ख़ूब है तकदीर पाई कर्बला ।
7 / मुस्तफा ओ मुर्तुज़ा शब्बीर ओ शबर के तुफैल,
है ख़ुदा ए पाक तक तेरी रसाई कर्बला ।
8 / मर्तबा तेरा भला कैसे घटाएगा कोई,
अर्श पर तहरीर है तेरी बड़ाई कर्बला ।
9 / देखकर ,इरफान, की आँखों को यह कहना पड़ा,
रँग लाई है तेरी जलवा नुमाई कर्बला ।
पेशकश, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी