महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । जालना जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल राजूर के ‘महागणपति राजूरोश्वर’ मंदिर से जुड़े सेवाकर्ताओं और महिलाओं का एक बड़ा समूह इन दिनों अयोध्या दौरे पर है। राजूर महागणपति राजूरोश्वर मंदिर से जुड़े 101 भक्तों का यह दल पूरी निष्ठा और सेवा भाव के साथ अयोध्या पहुंचा है, जहां उन्होंने रामलला के भव्य और नव-निर्मित मंदिर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। निशुल्क और निष्काम सेवा का संकल्प
राजूर महागणपति राजूरोश्वर मंदिर समिति के सुपरिटेंडेंट प्रशांत दानवे ने बताया कि मंदिर से जुड़े लगभग 200 से अधिक गांवों के समूह और सेवक वर्षभर बिना किसी स्वार्थ के मंदिर की सेवा में तत्पर रहते हैं। मंदिर की साफ-सफाई से लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल और दर्शन संबंधी समस्त व्यवस्थाएं ये सेवक अपने ही खर्चे और निस्वार्थ भाव से उपलब्ध कराते हैं। यहां तक कि सेवा से जुड़े ये लोग मंदिर का पानी तक ग्रहण नहीं करते और पूरी श्रद्धा से अपनी सेवाएं देते हैं। धार्मिक मान्यता और मनोकामनाएं मान्यता है कि राजूर के श्री गणेश जी की आराधना निस्वार्थ भाव से करने पर भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। इसी धार्मिक आस्था और प्रेरणा के चलते यह दल हर महीने नियमित रूप से राजूर से अयोध्या दर्शन के लिए आता है। इस निरंतर यात्रा का क्रम अनवरत जारी रहने वाला है, जिसकी परिकल्पना पूर्व केंद्रीय रेलवे राज्यमंत्री रावसाहब जी दानवे के मार्गदर्शन में की गई है। अयोध्या में रामलला के इस भव्य और दिव्य मंदिर की स्थापना से पूरे हिंदू धर्म में एक नई चेतना और अभूतपूर्व जागृति आई है। इस ऐतिहासिक बदलाव से न केवल देश के कोने-कोने से, बल्कि नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से भी भक्त यहां खिंचे चले आ रहे हैं। प्रशांत दानवे, सुपरिटेंडेंट (राजूर महागणपति संस्थान)
अयोध्या यात्रा से मिला अलौकिक आनंद दानवे ने बताया कि सुबह के सत्र में उनके पूरे 101 सदस्यीय दल ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के लल्ला स्वरूप के दर्शन किए, इसके अलावा ऐतिहासिक दशरथ महल और कनक महल का भी अवलोकन किया। इसके बाद सरयू तट पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिससे सभी भक्त भावुक और प्रसन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद संपूर्ण भारतवर्ष और विदेशों में भी सनातन संस्कृति के प्रति एक नई लहर दौड़ पड़ी है। इस सफल और संतोषजनक यात्रा से सभी सेवक बेहद उत्साहित हैं और आने वाले समय में यह धार्मिक यात्रा और अधिक व्यापक रूप लेगी।