प्राकृतिक वेगों को रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक : प्रो. डॉ. नवीन सिंह
आयुर्वेद में वर्णित 13 प्राकृतिक वेगों का रखें ध्यान, शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अनुराग लक्ष्य न्यूज
बस्ती। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में लोग अक्सर काम की व्यस्तता, मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल, अनियमित दिनचर्या और आलस्य के कारण शरीर के प्राकृतिक वेगों को रोक देते हैं। आयुर्वेद में प्राकृतिक वेगों को रोकने से बचने और शरीर के स्वाभाविक संकेतों का सम्मान करने पर विशेष जोर दिया गया है। प्राकृतिक क्रियाओं को अनावश्यक रूप से रोकने की आदत लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।
संकल्प योग वैलनेस सेंटर, कटेश्वर पार्क, बस्ती के निदेशक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आयुर्वेद में शरीर के कई प्राकृतिक वेगों का उल्लेख किया गया है, जिनमें मूत्र, मल, नींद, भूख और प्यास प्रमुख हैं। इन संकेतों को समझना और नियमित दिनचर्या के माध्यम से शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति करना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मूत्र और मल वेग को न करें नजरअंदाज
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि काम की व्यस्तता अथवा किसी अन्य कारण से मूत्र त्याग के वेग को बार-बार रोकना उचित नहीं है। इससे असहजता, पेट के निचले हिस्से में दर्द तथा मूत्र संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
इसी प्रकार मल त्याग के वेग को रोकने से कब्ज, पेट में भारीपन, गैस और पेट की असुविधा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि नियमित समय पर सोना, जागना और भोजन करना पाचन तंत्र को व्यवस्थित रखने में सहायक होता है।
नींद और भूख शरीर के महत्वपूर्ण संकेत
आज बड़ी संख्या में लोग देर रात तक मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। नींद आने के बावजूद जागते रहना शरीर के लिए लाभकारी नहीं है। पर्याप्त और नियमित नींद न मिलने से थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और दिनभर सुस्ती महसूस हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह भूख लगने पर भोजन को अनावश्यक रूप से टालना भी उचित नहीं है। लंबे समय तक भोजन न करने से कमजोरी, चक्कर और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन को उचित समय पर लेना स्वस्थ जीवनशैली के लिए जरूरी है।
प्यास के संकेत को भी समझें
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि व्यस्त दिनचर्या में लोग अक्सर पर्याप्त पानी पीना भूल जाते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर मुंह सूखना, थकान, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दिनभर शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेना आवश्यक है।
प्राकृतिक संकेतों का सम्मान ही स्वस्थ जीवन की दिशा
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग होने के बाद उपचार की बात नहीं करता, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिनचर्या, आहार-विहार और शरीर के स्वाभाविक संकेतों के प्रति जागरूकता पर भी जोर देता है। आधुनिक जीवन में स्वास्थ्य की उपेक्षा न करते हुए समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, उचित जल सेवन, नियमित योग एवं शारीरिक सक्रियता को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए शरीर के संकेतों को समझना और अनावश्यक रूप से प्राकृतिक वेगों को न रोकना जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली ही स्वस्थ एवं सुखी जीवन की आधारशिला है।