रिश्ते पीछे छूटे मानवता बनी सहारा सेवा समर्पण भाव परिवार ने वृद्धा को दिया मां जैसा सम्मान

रिश्ते पीछे छूटे मानवता बनी सहारा सेवा समर्पण भाव परिवार ने वृद्धा को दिया मां जैसा सम्मान

 

शक्ति शरण उपाध्याय

 

बस्ती। रिश्तों की संवेदनहीनता के बीच मानवता की मिसाल पेश करने वाली तस्वीर सामने आई है। करीब 70 वर्षीय वृद्धा ने जब अपनों के इंतजार में दुनिया को अलविदा कहा तो सेवा समर्पण भाव परिवार उनके लिए परिवार ही नहीं बल्कि बेटे का सहारा बनकर खड़ा हुआ। संस्था के मुखिया दिलीप पाण्डेय ने पुत्र का फर्ज निभाते हुए वृद्धा का पूरे सम्मान और हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।

करीब 25 दिन पहले हर्रैया नगर पंचायत के आसरा आवास में एक वृद्ध महिला और बुजुर्ग व्यक्ति की दयनीय हालत की जानकारी मिली थी। दोनों कई दिनों से कमरे में बंद थे और करीब 20 दिनों से भूखे-प्यासे रहने की बात सामने आई थी। सूचना मिलते ही सेवा समर्पण भाव परिवार की टीम मौके पर पहुंची और स्वास्थ्य विभाग व पुलिस प्रशासन के सहयोग से दोनों को बाहर निकालकर सीएचसी हर्रैया पहुंचाया। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

जिला अस्पताल में इलाज के दौरान संस्था के सदस्य लगातार दोनों की देखभाल और सेवा में जुटे रहे। इसी बीच 29 जुलाई को वृद्धा ने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। बताया जाता है कि उनका एक बेटा था। अस्पताल में रहने के दौरान वृद्धा बार बार कहती थीं कि मेरा दिलीप आएगा और मुझे यहां से ले जाएगा। लेकिन उनका इंतजार अधूरा रह गया और बेटा उन्हें लेने नहीं पहुंचा।ऐसे कठिन समय में सेवा समर्पण भाव परिवार के मुखिया दिलीप पाण्डेय ने इंसानियत का परिचय देते हुए वृद्धा को मां का सम्मान दिया। बस्ती के मुड़घाट पर पूरे विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया और स्वयं मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया।वृद्धा की अंतिम विदाई का यह दृश्य जहां रिश्तों की बदलती तस्वीर पर सवाल खड़े करता है, वहीं सेवा समर्पण भाव परिवार की संवेदनशील पहल मानवता के प्रति विश्वास मजबूत करती है। संस्था के इस कार्य की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। संस्था लगातार असहाय, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सेवा कर समाज के सामने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश कर रही है।

इस दौरान सत्यम मिश्रा राहुल गौतम उमंग पाण्डेय समेत सेवा समर्पण भाव परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।