🌹ओ३म्🌹*


🪷ज्ञान कुंभ का द्वितीय दिवस🪷*
आर्यावर्त्त साधना सदन दशहरा बाग बाराबंकी के तत्वाधान में चल रहे वेद महोत्सव के द्वितीय दिवस के📚ज्ञान कु़भ में स्नान📚 करते हुऐ श्रोताओं ने प्रारंभ में *वैदिक गीत* सुनाकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया! प्रारंभ में *सूत मिल उद्योग बाराबंकी* के अवकाश प्राप्त अधिकारी पं०अर्जुन देव जी ने ईश्वर भक्ति का गीत गाया।महान स्वतंत्रा संग्राम सेनानी भगवान दास जी के *प्रपौत्र ब्रह्मचारी सुशांत व प्रपौत्री ब्रह्मचारिणी हर्षाली* ने वैदिक भजन व महर्षि दयानंद जी के उपकारों पर मधुर गीत सुनाये!
ज्ञान कुंभ में स्नान कराते हुए आचार्य श्री ने बताया कि हमारे सामने दो प्रकार के जगत् है। *एक है पिंड तो दूसरा है ब्रह्माण्ड* पिंड [शरीर] में जीवात्मा व परमात्मा दोनों रहते हैं।मगर ब्रह्माण्ड में केवल परमात्मा रहता है।जीवात्मा ब्रह्माण्ड में इसलिए नहीं रहता क्योंकि वो *एकदेशीय* है और परमात्मा पिंड व ब्रह्माण्ड दोनों में इसलिए रहता है क्योंकि वो सर्व्यापक है।
पिंड व ब्रह्माण्ड दोनों की रचना ईश्वर ही करता है।एक आश्चर्य की बात जानिये कि *पिंड में रहता तो जीवात्मा है मगर वह पिंड* को बना नहीं सकता।ईट- पत्थर -संगमर के गगन चुंबी मकान तो मनुष्य बना लेता है मगर खुद अपना शरीर नहीं बना सकता।
आचार्य श्री ने ज्ञान कुंभ में स्नान कराते हुए बताया कि सर्वसाधारण भी जानता है कि……..
*क्षिति जल पावक गगन समीरा।पंच रचित यह अधम शरीरा*!मगर यह अधूरा ज्ञान है।यदि कोई आपसे पूछे कि जिन पांच तत्वों से यह शरीर बना है इन पांच तत्वों को किसने बनाया व कैंसे बनाया?इसका भी ज्ञान होना चाहिए।इस प्रकार शरीर निर्माण के संपूर्ण ज्ञान को प्राप्त करने के लिए *ईश्वरीय वाणी* वेद का ज्ञान जरूरी।आधुनिक विज्ञान में *फिजिक्स,कैमिस्ट्री* भी इस विज्ञान कै नहीं जानते हैं।हमने जब वैज्ञानिक से पूछा कि *सृष्टि कैंसे बनी?और किसने बनाई?और क्यों बनाई?* उनके पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। *क ई वैज्ञानिक कहते हैं तीस थ्योरी है।क ई कहते हैं बाय चांस सृष्टि बन ग ई ।कोई बनाने वाला नहीं है तो क ई कहते ब्लैक होल है।*
वैदिक ऋषियों का तर्क है कारण के बिना कोई कार्य नहीं होता।दुनियां का कोइ वैज्ञानिक इस तर्क को काट नहीं सकता *मगर वैज्ञानिक भी हठवादी* होते हैं जो कार्य रुपी सृष्टि का कर्ता ही नहीं मानते!
अंत में आचार्य श्री ने बताया कि कल के *ज्ञान कुंभ स्नान* में चर्चा करेंगे कि *संसार व शरीर* दोनों परमात्मा बनाता है ।इस प्रकार आज का कार्यक्रम शांति पाठ,वैदिक जयघोष व अभिवादन के साथ सम्पन्न हुआ!
पं०रुक्मिणी जोशी
*व्यवस्थापिका*
आर्यावर्त्त साधना सदन बाराबंकी।
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