अयोध्या धाम में गूंजा ‘विठ्ठल-विठ्ठल’, जगद्गुरु राघवाचार्य रामलला सदन के पावन सानिध्य में विट्ठल सदन में हुई भगवान पंढरीनाथ की प्राण प्रतिष्ठा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या (रामनगर बेगमपुरा)
नगरी अयोध्या आज 27 जुलाई को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल की साक्षी बनी है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब पावन धाम में भगवान पंढरीनाथ (विट्ठल देव) का प्रथम मंदिर बनकर तैयार हो गया है, जिसका नाम ‘विट्ठल सदन’ रखा गया है। जगद्गुरु राघवाचार्य रामलला सदन के पावन सानिध्य में आज विधि-विधान के साथ विट्ठल सदन में भगवान पंढरीनाथ की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। प्रमुख संत और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति इस अलौकिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में संत-महात्माओं का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से एस्टन सम्पत महाराज सदानंद महाराज
विष्णुदास सतीश मालू इसके साथ ही, इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में रमेश मिश्रा उर्फ शिबू और अतुल बाबा की विशेष और सराहनीय भूमिका रही, जिनकी देखरेख में अनुष्ठान संपन्न हुआ। भगवान श्री राम का ही मुस्कान स्वरूप हैं विट्ठल देव
धार्मिक मान्यताओं और वारकरी परंपरा के अनुसार, भगवान पंढरीनाथ को प्रभु श्री राम का ही अवतार और उनका मुस्कान स्वरूप माना जाता है। महाराष्ट्र के वारकरी समुदाय के ये प्रमुख आराध्य देव अब श्री राम की नगरी अयोध्या में भी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
विट्ठल सदन की मुख्य विशेषताएं
अयोध्या का प्रथम विट्ठल मंदिर: रामनगर बेगमपुरा स्थित ‘विट्ठल सदन’ अयोध्या का पहला ऐसा मंदिर है, जहां भगवान पंढरीनाथ की स्थापना की गई है।मनमोहक विग्रह प्राप्त विवरण के अनुसार, भगवान पंढरीनाथ इस मंदिर में बेहद शांत और मुस्कान मुद्रा में विराजमान हुए हैं, जो दर्शन मात्र से भक्तों के मन को मोह लेते हैं। आज आयोजित हुए इस प्राण प्रतिष्ठा उत्सव को लेकर महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से पहुंचे वारकरी संप्रदाय के भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला। पूरा क्षेत्र ‘जय विट्ठल, पांडुरंगा’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।