बस्ती 21 जून
को राजकीय महाविद्यालय रुधौली बस्ती में “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” के अवसर पर “योग कार्यक्रम” का आयोजन किया गया।इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य ने भारतीय संस्कृति में योग की महत्ता एवं दर्शन पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि योग एक शारीरिक व्यायाम नहीं है बल्कि ध्यान, साधना और जीवन जीने की संपूर्ण शैली को दर्शाता है। जिसकी ऐतिहासिक जड़े वेदों और उपनिषदों में मिलता है। इसका प्रथम प्रमाण ऋग्वेद में प्राप्त होता है। तत्पश्चात उपनिषदों और भागवत गीता में भी इसके प्रमाण मिलते हैं और इसके महत्व को समझाया गया है। सिंधु घाटी सभ्यता के अंतर्गत भी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में जो योगी की मूर्तियां प्राप्त हुई है, वह योग की प्राचीन ऐतिहासिकता को दर्शाता है। आज की परिवेश में जिस तरह आधुनिकता के नाम पर हम जिस जीवन शैली और दिनचर्या को अपनाते जा रहे हैं उससे न सिर्फ हमारा शारीरिक बल्कि मानसिक और बौद्धिक संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है। ऐसे में योग की महत्ता एवं प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। आज पश्चिमी संस्कृति और आधुनिकता, हमारी इस प्राचीन संस्कृति और विरासत को नष्ट कर रहा है। किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत होती है,उन विरासतों में योग एक ऐसा दर्शन है,जो हमारी परम्परा और संस्कृति को वैश्विक रूप देने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए आवश्यक है कि हम योग को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें। जिससे संपूर्ण विश्व में अपनी इस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं सदस्यों ने योग के विभिन्न साधनों एवं मुद्राओं का अभ्यास किया और उनके महत्व को समझने का प्रयास किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, विभिन्न गणमान्य नागरिक व् समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।