अयोध्या ई-रिक्शा चालकों का आंदोलन हुआ उग्र, अनिश्चितकालीन धरने में बदली हड़ताल

 

प्रशासन पर सौतेले व्यवहार का आरोप, संत-महंतों और समाजसेवियों ने दिया खुला समर्थन

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या धाम। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या के प्रमोद वन मोहल्ले में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे ई-रिक्शा चालकों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। कृष्णानंद फाउंडेशन ई-रिक्शा यूनियन और श्री अयोध्या जी ई-रिक्शा कल्याण सेवा समिति के संयुक्त आह्वान पर चल रही हड़ताल अब अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील हो गई है। जिला अध्यक्ष विकास सिंह के नेतृत्व में हजारों की संख्या में चालक अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें, संतों ने थामी चालकों की बांह
हड़ताल के चलते अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ई-रिक्शा का संचालन ठप होने से आवागमन की व्यवस्था चरमरा गई है। चालकों की जायज मांगों और प्रशासन के अड़ियल रुख को देखते हुए स्थानीय संत-महंतों और समाजसेवियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन घोषित कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद उनके पास आंदोलन को तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। वोट हमारा, रोजगार बाहरी को क्यों यूनियन के संस्थापक मुकुंद माधव त्रिपाठी ने प्रशासन पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “हम अयोध्या के मूल निवासी और मतदाता हैं। हमने पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक का चुनाव किया, लेकिन आज प्रशासन हमारे साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सबका साथ-साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली सरकार अब अपने ही लोगों की रोजी-रोटी छीन रही है। गोल्फ कार्ट के ठेके पर विवाद नारी शक्ति सेवा की अध्यक्ष गुड़िया त्रिपाठी ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि अधिकांश चालकों ने बैंकों से कर्ज लेकर रिक्शा खरीदे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि। राम मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण तक इन चालकों ने सेवा की अब बाहरी लोगों को ठेका देकर गोल्फ कार्ट चलाई जा रही हैं श्रद्धालुओं से मनमाना किराया वसूला जा रहा है, जबकि स्थानीय चालकों को हाशिए पर धकेल दिया गया है। सत्ता को चेतावनी: 2027 में दिखेगा असर अंतरराष्ट्रीय कथावाचक जया किशोरी रामायणी ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अदूरदर्शिता के कारण हजारों हिंदू परिवारों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर 2027 के चुनावों पर पड़ेगा। वर्तमान स्थिति प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अनिश्चितकालीन धरना और अनशन जारी रहेगा। साधु-संतों और महिलाओं के भी इस आंदोलन में शामिल होने की चेतावनी से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।