वरिष्ठ पत्रकार/साहित्यिकार/’दि ग्राम टूडे’ प्रकाशन के समूह संपादक/आदरश्रेष्ठ अग्रज डा. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी के जन्मदिन (27 जनवरी) पर विशेष 

वरिष्ठ पत्रकार/साहित्यिकार/’दि ग्राम टूडे’ प्रकाशन के समूह संपादक/आदरश्रेष्ठ अग्रज डा. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी के जन्मदिन (27 जनवरी) पर विशेष

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संस्मरण – एक यादगार मुलाकात

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सरल सहज व्यक्तित्व के धनी, प्रेरक व्यक्तित्व ग्रामीण चेतना, सामाजिक सरोकारों एवं जनहितकारी पत्रकारिता के साथ साहित्यिक के प्रति प्रतिबद्ध, आदरश्रेष्ठ अग्रज डा. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी से आभासी संपर्क लगभग 4 वर्षों से है लेकिन मुलाकात का संयोग नहीं बन पा रहा था। हमारी बातचीत होती रही है। रचना समाचार प्रकाशन के अलावा निजी तौर पर भी और अखबार, ब्लॉग में किसी आयोजन, पत्रिका प्रकाशन के पूर्व भी। इतने बड़े प्रकाशन समूह के समूह संपादक से इतनी सरलता से संवाद हो जाना बहुत बड़ी बात होती है। लेकिन पाण्डेय जी हर किसी को बड़ी आसानी से और हर समय पारिवारिक सदस्य की तरह उपलब्ध मिल जाते हैं। सामने वाले की बात सुनते, अपनी कहते। दि ग्राम टूडे अखबार के सभी संस्करण अथवा ब्लॉग में रचनाएं सिर्फ प्राथमिकता से प्रकाशित ही नहीं करते कराते, अपितु रचनाकारों को प्रोत्साहित भी करते हैं। आनलाइन आयोजनों के समाचारों को भी प्रकाशित कर हौसला अफजाई भी करते हैं। उनके बारे में मेरा निजी अनुभव तो यह है कि मेरे लिए वे अग्रज और अभिभावक जैसा बोध कराते हैं। पद, प्रतिष्ठा की धमक से दूर निहायत शालीन व्यक्तित्व। जो आगे बढ़कर लोगों को अपना बना लेने में महारत हासिल किए हुए है।

पाण्डेय जी मिलने की इच्छा हमेशा ही बलवती रही है, लेकिन समय , परिस्थिति और स्वास्थ्य भी अवरोधक बनता रहा। अंततः वह सुखद संयोग आ ही गया जब पहली और एकमात्र मुलाकात का अवसर लंबी प्रतीक्षा के बाद 31 मार्च 2025 को गोरखपुर में मिला। वह मुलाकात भी अप्रत्याशित रूप से ही हुई थी।

हुआ यूँ कि संभवतः 27 या 28 मार्च को पाण्डेय जी की एक पोस्ट फेसबुक पर देखकर यह जान पाया कि आप गोरखपुर में हैं। बिना देर किए मैंने उन्हें फोन किया और पूछा कि क्या आपका बस्ती आगमन का भी कोई प्रोग्राम है, मुलाकात हो सकती है? (बस्ती इसलिए भी, क्योंकि पिछले लगभग पांच वर्षों से पक्षाघात के इलाज के सिलसिले में मेरा प्रवास स्थल बस्ती में ही है।) उस समय शायद उन्हें ध्यान नहीं था कि मैं बस्ती में हूँ। उन्होंने जवाब में कहा कि जब भी मैं गोण्डा आऊँगा, आपसे जरुर मिलूँगा।

जब मैंने उन्हें बताया कि मैं आपसे मिलना चाहता हूँ आपका गोरखपुर में क्या प्रोग्राम है? तब आपने मुझे बताया कि अभी तो मैं गाँव जा रहा हूँ, 30/31 मार्च को को गोरखपुर में रहूँगा। यह सुनकर मेरा उत्साह बढ़ गया, मैंने पूछा कि 31 मार्च को गोरखपुर में मुलाकात हो सकती है? उनके सकारात्मक उत्तर के बाद मैंने बताया मैंने उन्हें बताया 30 को फाजिलनगर में एक साहित्यिक आयोजन में शामिल होने मुझे जाना है।रात गोरखपुर मेँ रहूँगा, 31 को आपसे मुलाकात कहाँ हो सकती है? तब उन्होंने कहा कि क्यों न एक छोटी सी गोष्ठी हो जाय, कुछ और लोगों से भी मिलना हो जायेगा। मैंने सहर्ष सहमति दी और तत्काल गोरखपुर में वरिष्ठ कवि अभय श्रीवास्तव दादा से पूरी बात बताई।।(वैसे भी मुझे फाजिल नगर अभय दादा के साथ जाना और वापस उन्हीं के घर ठहरना था।) तो उन्होंने कहा क्यों न गोष्ठी मेरे घर पर ही रख लिया जाए। वैसे काफी दिनों से उनकी अपने घर पर एक गोष्ठी प्रस्तावित थी, जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने मुझे दे रखी थी। लेकिन मेरी विवशता के कारण हो नहीं पा रही थी। मैंने पाण्डेय जी को पूरी योजना बताई, जिसे उन्होंने प्रसन्नता के साथ स्वीकार भी कर लिया।

29 मार्च को अभय दादा मुझे बस्ती लेने आए और फिर हम दोनों गोरखपुर गए, रात्रि विश्राम दादा के घर पर हुआ।30 को फाजिल नगर के आयोजन में शामिल होकर लौटते समय मैंने गोरखपुर में कवियों कवयित्रियों से संपर्क साधना शुरू किया और गोरखपुर पहुँचने तक 10-12 लोगों की सहमति भी मिल गई। गोरखपुर पहुंचकर कुछ और लोगों से बात और सहमति के बाद, सुबह भी कुछ लोगों से सहमति प्राप्त कर हम उत्साह से भर चुके थे। लगभग 22-24 लोगों ने हमें आश्वस्त किया। अभय दादा के उत्साह ने हमें संबल प्रदान किया।

अंततः वो घड़ी आ ही गई जब हम दोनों पाण्डेय जी को घर लेकर आए। इस तरह गोष्ठी का आयोजन आ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी के सम्मान में लगभग 4 बजे शुरू हुई। जिनमें वरिष्ठ कवि साहित्यकार चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा अकिंचन, वरिष्ठ शायर बहार गोरखपुरी, नंद लाल त्रिपाठी ‘पीतांबर’, बद्रीनाथ सांवरिया, ममता प्रीति श्रीवास्तव, अंजू विश्वकर्मा, प्रियंका दूबे प्रबोधिनी, डा. धनंजय मणि त्रिपाठी, डा. दिनेश पाण्डेय, राम समुझ सांवरा, रमेश सिंह दीपक (देवरिया), ज्ञान प्रकाश राही व दीपक गोस्वामी चिराग (संभल) आदि शामिल रहे। आयोजक अभय कुमार श्रीवास्तव ‘ज्योति जिज्ञासु’ जी रहे। जबकि संयोजन का जिम्मा मेरे ऊपर था। लगभग 3 घंटे तक गोष्ठी चली। हम सभी अपने बीच अग्रज स्वरूप पाण्डेय जी को पाकर गदगद थे। जलपान के बाद हमने पाण्डेय जी को रुड़की के लिए विदा किया। पीताम्बर जी ने पाण्डेय जी को स्टेशन ले जाकर ट्रेन में बिठाकर हमें सूचना दी।

इस तरह लंबे समय से आपसे मुलाकात का सपना पूरा हो गया। आज भी जब इस मुलाकात के बारे में सोचता हूँ तो सहसा विश्वास करना कठिन लगता है।कि इतनी आसानी से वटवृक्ष सरीखी शख्सियत के साथ मिलने, साथ बैठने, बतियाने का अवसर भी मिल सकता है? लेकिन मुझे मिला। 31 मार्च ‘2025 की चंद घंटों की मुलाकात एक यादगार मुलाकात के रूप हमेशा जीवंत रहेगी।

जन्मदिवस पर हमारी आदरश्रेष्ठ अग्रज को असीम बधाइयां शुभकामनाएं, आप सदैव स्वस्थ सानंद रहें और साहित्य साधकों के सारथी की भूमिका के साथ अभिभावक की भूमिका यूँ ही निभाते रहे। सादर नमन वंदन दादा

 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

8115285921