महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। जानकीघाट स्थित प्रतिष्ठित पीठ सीताराम निवास मंदिर के पूर्व महंत रामसुरेश दास महाराज की 11वीं पुण्यतिथि शनिवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत आचार्य भूषण दास महाराज ने अपने गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें याद किया। संतत्व और सेवा का संगम श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आचार्य भूषण दास ने कहा कि उनके गुरुदेव त्याग, तपस्या और वैराग्य की जीवंत प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा, “महाराज जी का व्यक्तित्व अत्यंत उदार और सरल था। वे न केवल एक गौ और संत सेवक थे, बल्कि एक उच्च कोटि के भजनानंदी महात्मा भी थे। उन्होंने ‘सेवा ही परमो धर्म’ के मार्ग को आत्मसात किया और अपने शिष्यों को भी इसी सेवा भाव की शिक्षा दी।धार्मिक अनुष्ठान और संतों का जमावड़ा पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव परंपरागत रूप से आयोजित किए गए। संतों ने महाराज जी के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। वर्तमान में भी मंदिर द्वारा संचालित गौ सेवा, विद्यार्थी सेवा और दीन-दुखियों की सेवा निरंतर जारी है। इन प्रमुख संतों की रही उपस्थिति कार्यक्रम के अंत में आचार्य भूषण दास ने पधारे हुए सभी संत-महंतों का स्वागत-सत्कार और विदाई की। इस गरिमामयी अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे महंत कमलनयन दास (मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी) महंत राजकुमार दास (रामवल्लभाकुंज के अधिकारी) महंत रामकुमार दास (हनुमानगढ़ी के सरपंच) महंत गिरीश दास (डांड़िया मंदिर) इसके साथ ही महंत रामजी शरण, महंत अवनीश दास, महंत रामलोचन शरण, और बड़ी संख्या में मंदिर से जुड़े शिष्य व अनुयायी उपस्थित रहे।