महंत एकनाथ महाराज की कड़ी चेतावनी- ‘गुरुजी को कुछ भी हुआ तो नागा साधुओं के साथ करेंगे देशव्यापी आंदोलन
महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंसाचार्य को शुक्रवार को अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई है। इस घटना के बाद से अयोध्या के संत समाज और सनातन प्रेमियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। धमकी देने वाले व्यक्ति ने हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर बयानबाजी को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा कि, “हिंदू राष्ट्र पर बोलना बंद करो, वरना तुम्हारे इतने टुकड़े कर दिए जाएंगे कि पहचानना मुश्किल हो जाएगा।” फोन पर अश्लील गालियां और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं। इस गंभीर मामले पर ओजस्वी फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं जगतगुरु परमहंसाचार्य के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश की योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जो सरकार खुद को हिंदुओं की संरक्षक बताती है, वह सनातन के लिए संघर्ष करने वाले संतों की रक्षा करने में विफल साबित हो रही है।
महंत एकनाथ महाराज ने कहा, हमारे गुरुजी राष्ट्र और सनातन सेवा के लिए समर्पित हैं। उनके प्रयासों से ही अयोध्या के परिक्रमा मार्ग में मांस-मदिरा की बिक्री बंद हुई। उन्होंने सदैव निर्भीक होकर गौ माता और सनातन समाज के लिए आवाज उठाई है, लेकिन आज उन्हें ही खुलेआम धमकियां मिल रही हैं।”
6 महीने पहले दी थी बड़ी घटना की चेतावनी महंत ने दावा किया कि जगतगुरु परमहंसाचार्य ने छह महीने पहले ही किसी बड़ी अनहोनी या असामाजिक तत्वों की सक्रियता का संकेत दिया था, जो बाद में राम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने जैसी घटनाओं के रूप में सच साबित हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी सटीक भविष्यदृष्टि रखने वाले संत की सुरक्षा को लेकर सरकार अब तक लापरवाह क्यों है।
‘Z+’ सुरक्षा की मांग, आंदोलन की चेतावनी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि जगतगुरु परमहंसाचार्य को तत्काल Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाए। धमकी देने वाले आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि गुरुजी को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी योगी सरकार की होगी। हम संपूर्ण भारत के नागा साधुओं को एकजुट कर उत्तर प्रदेश में व्यापक आंदोलन करेंगे। अगर हिंदूवादी सरकार संतों की रक्षा नहीं कर सकती, तो उसकी कथनी और करनी का अंतर जनता के सामने आ जाएगा। मामले की सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दे दी गई है। संत समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।