अयोध्या के राजा ने 2000 करोड़ की पैतृक संपत्ति पर कब्जे का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। अयोध्या के दियरा स्टेट के राजा बृजेंद्र प्रताप शाही ने अपनी लगभग 2000 करोड़ रुपये की पैतृक ज़मीन पर जालसाजी और धोखाधड़ी से कब्ज़ा करने का आरोप लगाया है। इस गंभीर मामले में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की अपील की है। भाजपा नेता और मित्र मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पाठक ‘बाबा’ के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, राजा बृजेंद्र प्रताप शाही ने बताया कि उनकी 336 गांवों में फैली विशाल रियासत की ज़मीनों को फर्जी दस्तावेज़ों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। राजा बृजेंद्र प्रताप शाही ने आरोप लगाया कि उनके चचेरे भाई शिवेंद्र प्रताप शाही ने जाली हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेज़ों का सहारा लेकर खुद को ज़मीन का वारिस घोषित कर दिया था। शिवेंद्र प्रताप शाही की मृत्यु के बाद, उनके पुत्रों प्रणय शाही, प्रतीक शाही और पत्नी प्रतिमा शाही पर भी इन ज़मीनों की विरासत फर्जी तरीके से अपने नाम कराने और उन्हें बेचने का आरोप है।
इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए राजा बृजेंद्र प्रताप शाही ने कहा कि हैंडराइटिंग विशेषज्ञों ने भी इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है, और बताया है कि दस्तावेज़ों पर उनके पूज्य पिता राजा जगदीश प्रताप शाही के हस्ताक्षर नहीं थे। इस घोटाले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एडीजी नामाला रवींद्र की पत्नी नामाला इंद्राणी का नाम भी सामने आया है, जिन पर लगभग 350 करोड़ रुपये की ज़मीन बेहद कम दामों पर खरीदने का आरोप है। राजा बृजेंद्र प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर पूरा भरोसा जताते हुए उनसे इस मामले में शामिल भ्रष्टाचारियों और जालसाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, उन्हें जेल भेजने और उनकी पैतृक संपत्ति वापस दिलाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार अपनी पैतृक संपत्ति पर जा भी नहीं पा रहा है और उन्हें बेदखल करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। उन्होंने पत्रकारों से भी अपील की है कि वे इस मामले की सच्चाई को जनता और अधिकारियों के सामने लाएँ ताकि दियरा स्टेट के गौरवशाली इतिहास और उसकी संपत्ति को बचाया जा सके।