अनुराग लक्ष्य, 16 सितंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
आज मुंबई वासियों को एक शायर का कलाम बहुत अच्छा लग रहा है और उस शायर को लोग अपना प्यार और दुलार दे रहे हैं। उस शायर को लोग साहिल प्रतापगढ़ी के नाम से जानते और पहचानते हैं । पेश है उसी शायर की एक ग़ज़ल,
१- हर इक बंधन सूना सूना,
घर का आंगन सूना सूना ।
२- लौट के घर आजा परदेसी,
लगता है मन सूना सूना।
३- अब तो संवरना हमको काटे,
तुझ बिन दर्पन सूना सूना ।
४- फूल खिले हैं मनमोहक पर,
लगता उपवन सूना सूना ।
५- मन का पपीहा बोल न पाए।
उसका गुंजन सूना सूना ।
६- मन भाए न बिंदिया काजल,
पायल कंगन सूना सूना ।
७- सूख गये हैं रोते रोते,
नैन का अंजन सूना सूना ।
८- रंग बिरंगी है ये दुनिया,
फिर भी जीवन सूना सूना ।
९- रुत फागुन की बीत गयी अब,
रिमझिम सावन सूना सूना ।