बसंती रंग में रंग दे चुनरिया आज तू मेरी – अंजना सिन्हा

गीत

**”**

 

बसंती रंग में रँग दे चुनरिया आज तू मेरी।

खिली है खेत में सरसों नज़रिया चाह में तेरी।।

रहा लद आम बौरों से मटर में लग रही फलियां।

लुटाती ख़ुशबुओं के कोष उपवन में खिली कलियां।।

बिछाए नैन साँवरिया मैं बैठी राह में तेरी …

बसंती रंग में रँग दे चुनरिया आज तू मेरी।।

 

रहा मधुमास का मौसम भरा मकरंद फूलों में।

झुला दे तू पिया आकर मुझे बाहों के झूलों में।।

हँसूं मैं खिल खिला करके अटरिया खास हो तेरी

बसंती रंग में रँग दे चुनरिया आज तू मेरी।।

 

न बीते प्यार का मौसम न बीतें दिन बहारों के।

नज़र तुझ से मिलकर के चुरा लूं इन नजारों से।।

बहल जाता है मन मेरा ख़बरिया खास हो तेरी…

बसंती रंग में रँग दे चुनरिया आज तू मेरी।।

 

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़