🌼🌼 ओ३म् 🌼🌼
*ज्ञान-कुंभ स्नान कक्षा-११*
प्यारे पाठक वृंद सादर नमस्ते! अभी तक हमने *ब्रह्माण्ड के पांच तत्वों में से प्रथम तत्व शरीर,द्वितीय मन,तृतीय तत्व बुद्वि का संपूर्ण विश्लेण किया है* वाटसप गुरुकुल कक्षा -१० में हमने ब्रह्माण्ड के *चौथे तत्व आत्मा के कुछ मौलिक सिद्धांतों की* की चर्चा की थी।आगे इसका विस्तार करना हे।गतांक से आगे…………………
🔥 धर्म जिज्ञासा🔥
*हम कैंसे ठीक-ठीक पता लगाएं कि यही आत्मा है?*
🔥सम्यक् समाधान🔥
यह प्रश्न जिस जीव में मन में उठता है समझो उस पर भगवान की कृपा हो ग ई।इस एक प्रश्न को समझने से *पाखंड का महल* एक सेकेंड में चकना-चूर हो जायेगा।अब आप सावधानी से स्वाध्याय यानि *ज्ञानकुंभ में स्नान* करें ताकि आपकी समझ में आ जाए कि वास्तव में आत्मा क्या है।न्याय दर्शन में *गौतम मुनि* कहते हैं।
*इच्छाद्वेषप्रयत्नसुखदु:खज्ञानान्यात्मनो लिंगमिति-१/१/१०*
अर्थात् जहां-जहां ये छ: लक्षण दिखाई दे उसे आत्मा की सिद्धि मानो! यह सबसे अधिक सरल विधि है *मैं आत्मा हूं या आत्मा ऐंसी है* इस बात कै समझने के लिए!अब इन छ: लक्षणों पर स़क्षिप्त टिप्पणी करते हैं।
*[१] इच्छा* आपके अंदर इच्छा है या नहीं?उत्तर होगा है।बहुत है या थोड़ी?उत्तर होगा अनंत हैं! यह इच्छा आत्मा के होने का पहला लक्षण है।मुर्दे में इच्छा नहीं होती।जिंदे में इच्छा आत्मा के होने के कारण ही होती है।
*[२] द्वेष* आत्मा का यह दूसरा लक्षण है। दो कुत्तों के बीच मे एक रोटी का टुकड़ा डाल दें फिर देंखें महासंग्राम। यह *महासंग्राम ही द्वेष* है। दो मोटर साईकिल के बीच में एक लीटर पेट्रैल रख दीजिए मगर कुछ भी नहीं होगा क्योंकि उनमें आत्मा नहीं होती।
*[३] प्रयत्न* यह आत्मा के होने की तीसरी पहचान है।प्रयत्न का मतलब है * *स्वयं गति करना*। हवाई जहाज उड़ता है मगर अपने -आप नहीं उड़ता जबकि पक्षी अपने प्रयत्न से स्वयं उड़ती है कारण उसमें चेतन आत्मा है।
*[४] सुख* यह आत्मा का चौथा लक्षण है।अच्छे का फल सुख होता है।आप अपने मकान पर एशियन पेन्ट लगाया मगर जड़ मकान को कुछ नहीं मालुम।मगर आप अपने बच्चे के लिए नये कपड़े बनाये।बच्चा कपड़ा पहनकर इठलाता है कारण उसमें आत्मा है।इस प्रकार सुखी होना आत्मा का लक्षण है।
*[५] दु:ख* यह आत्मा का पांचवा लक्षण है।बुरे कर्म करने पर उसका जो फल मिलता है वही दु:ख है उसका भोग आत्मा को ही करना होता है।जब आत्मा शरीर छोड़ देता है तब उस मरी लाश को दुख नहीं होता!अत: *शरीर को नहलाने का आत्मा पर कोई असर नहीं पड़ता* क्योंकि शरीर जड़ है आत्मा निराकार व चेतन तत्व है।
*[६] ज्ञान* यह आत्मा का छठा व अंतिम लक्षण है।इसे समझ लें।मैं जिस माईक से प्रवचन करता हूं वो मेरी आवाज को दूर तक ले तो जाता हे मगर माईक को कुछ पता नहीं कि मैंने क्या बोला? क्योंकि माईक में आत्मा नहीं परंतु जो श्रोता है वो जान जाता है कि क्या बोला जा रहा हैय।यह ज्ञान होना ही आत्मा के होने का छठा लक्षण है।
इस प्रकार आज हमने *ज्ञानकुभ* में स्नान कर जाना कि ब्रह्माण्ड के चौथे तत्व आत्मा के छ: लक्षण हैं।पाप-पुण्य,धर्म-अधर्म, ज्ञान-ध्यान का संबध आत्मा से है न कि शरीर से।अत:*आत्मा की पवित्रता गंगा स्नान से नहीं ज्ञान-गंगा* से अर्थात् संध्या,सत्संग,सेवा,परोपकार से है।शेष परिचर्चा क्रमश:……………
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय* आर्यावर्त्त साधना सदन
पटेल नगर दशहराबाग उत्तर प्रदेश।