युवा रत्न को मिला सम्मान, भगवान ऋषभदेव के महामंडल विधान का आयोजन

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या।श्री भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन (बड़ी मूर्ति) मन्दिर रायगंज स्थित प्रागंण में भगवान ऋषभदेव का महामंडल विधान की पंचामृत अभिषेक के साथ प्रारम्भ हुआ। भगवान ऋषभदेव के इस आठ दिवसीय कार्यक्रम के तीसरे दिन भगवान ऋषभदेव मण्डल का आयोजन किया गया। इसमें भगवान के 108 गुणों से युक्त अर्घ्य समर्पण किये गए।भगवान ऋषभदेव ने 6 प्रकार के कर्म का उपदेश दिया।इस शृंखला में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने बताया कि भगवान ऋषभदेव ने युग की आदि में शाश्वत तीर्थ अयोध्या में जन्म लिया एवं प्रजा को जीना सिखाया। उन्होंने जीवन के मूलभूत 6 प्रकार के कर्म का उपदेश दिया। इसमें असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प इन क्रियाओं के द्वारा जीवन यापन करने की विधि बताई।उन्होंने कहा कि इससे पूर्व पृथ्वी पर कल्पवृक्ष फल देते थे। उनके समक्ष जाकर के व्यक्ति जो भी भावना करता था उसे वह वस्तु प्राप्त हो जाती थी। लेकिन जब कल्पवृक्षों ने फल देना बन्द कर दिया तब इन कर्म को करके व्यक्ति अपने जीविका को चलाता था।संयम जैन ने धर्म के प्रसार प्रचार के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया।अयोध्या जैन मन्दिर के प्रवक्ता विजय कुमार जैन मंत्री अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी ने बताया कि इस अवसर पर जम्बू द्वीप हस्तिनापुर (मेरठ) से आए इंजीनियर. संयम जैन सुपुत्र संजय जैन को युवारत्न उपाधि से अलंकृत किया गया। जिन्होंने इनसाइक्लोपीडिया ऑफ जैनिज्म की वेवसाइड पर जैन धर्म के प्रसार प्रचार के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया एवं अपनी गुरुभक्ति समर्पण और त्याग के द्वारा एक ऐतिहासिक कार्य किया।1 हजार से ज्यादा शास्त्रों को वेबसाइड पर डाउनलोड किया।1 हजार से ज्यादा शास्त्रों को वेबसाइड पर डाउनलोड करने का एवं जन-जन को वेबसाइड से जोड़ने का कार्य किया। इसके लिए श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों के द्वारा परम पूज्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता अयोध्या जैन मन्दिर धर्म क्षेत्र के पीठाधीश रवीन्द्रकीर्ति स्वामी की गरिमामयी उपस्थिति में इंजीनियर. संयम जैन को युवारत्न की उपाधि देकर के तीर्थक्षेत्र कमेटी की तरफ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, पंकज शाह, पं. दीपक उपाध्ये,अध्यात्म जैन, सम्यक जैन एवं महाराष्ट्र भक्त मण्डल के 250 लोगों की उपस्थिति रही।सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैन प्रश्न मंच का आयोजन किया गया।प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता ने बताया कि कर्म प्रधान ये भारत देश जहाँ पर कर्म की प्रधानता है जो व्यक्ति कर्म करता है वह सदैव उन्नति को प्राप्त होता है। हर व्यक्ति को अपने जीवन निर्माण के लिए तत्पर रहना चाहिए। इसी क्रम ने शाम को भगवान की भक्ति एवं आरती की गई एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैन प्रश्न मंच का आयोजन किया गया। जिसमें धर्म से जुड़े प्रत्येक पहलु पर प्रश्न किए गए एवं उत्तर देने वाले प्रतिभागी को तीर्थ क्षेत्र कमेटी अयोध्या के द्वारा सम्मानित किया गया, सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्त मंडल के द्वारा प्रस्तुत किया गया।