बहराइच – अवध वाटिका मंच जनपद बहराइच के तत्वावधान में पाक्षिक काव्य गोष्ठी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सभागार में वरेण्य साहित्यकार एवम पूर्व विधायक राम सागर राव की अध्यक्षता ,डा.अशोक पाण्डेय गुलशन के मुख्य आतिथ्य तथा रमेश चन्द्र मिश्र महामंत्री स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के विशिष्ठ आतिथ्य में काव्य गोष्ठी का शुभारंभ हुआ ,संचालन कवि तिलक राम अजनबी एडवोकेट ने किया ।कार्यक्रम का शुभारम्भ विनोद कुमार पाण्डेय की वाणी वंदना से हुआ ।तत्पश्चात नवोदित रचनाकार महीप चंद कनोजिया ने पढ़ा -ओ भइय्या तुमसे का कही ई शादी है की नाटक है ,हमका तो अइसन लागत है की पूर्ण नरक कै फाटक है ।युवा रचनाकार धीरेन्द्र सिंह तोमर ने पढ़ा -हारना सीखा नही है जीतना हर बार है ।जंग ही मेरे लिए तो सिर्फ एक त्योहार है ।किशोरी लाल चौधरी एडवोकेट ने हिन्दी पर रचना पढ़ी -मैं आन बनूँ मैं शान बनूँ ,मैं राष्ट्र का गौरव मान बनूँ ।शिक्षक शायर मोह० नसीम ने पंक्तियाँ कुछ यूं पढ़ीं -चली आंधियां बच के रहना जरा ,हिली कश्तियां बच के रहना जरा ।नवोदित रचनाकार शहनाज जहाँ ने कलाम पेश किया -नही होती किसी से कम बेटियां ,जहां को दिखाना चाहती हूँ ।शायर रईस सिद्दीकी ने गज़ल का मतला पढ़ा -क्यों नही आए अयादत को मेरी,आपके खत से वज़ाहत हो गयी ।कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि तिलक राम अजनबी ने छन्द पढ़ा -तुलसी के मन मानस में जनमानस का उद्धार है हिन्दी ,सूर के स्वर में माँ यशुदा का निश्छल प्यार दुलार है हिन्दी ।हास्य कवि पी.के.प्रचण्ड ने पढ़ा -कहीं ऊँची पहाड़ी है कहीं कुछ खाइयां भी हैं ,कहीं कुछ खामियाँ हैं तो कहीं अच्छाइयाँ भी हैं ।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जनपद के वरेण्य साहित्यकार डा. अशोक पाण्डेय गुलशन ने छोटी बहर की बेहतरीन गज़ल पढ़ी -लिखा है जो वही होगा ,नया कुछ भी नही होगा ,व्यर्थ है ढूँढना उसको ,जहां था वो वहीं होगा ।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रमेश चंद मिश्र ने कार्यक्रम की सराहना की सभी कवियों का आभार व्यक्त किया और अवध वाटिका साहित्य मंच के उत्तरोत्तर विकास की कामना किया तत्पश्चात कार्यक्रम के अध्यक्ष महोदय के उदबोधन के बाद कार्यक्रम समापन की घोषणा हो गई*