शाहिद बस्तवी के आकस्मिक निधन पर शायरों ने दी श्रद्धांजलि

साहित्यिक संस्था अदबी संगम बस्ती के तत्वावधान में उर्दू अदब के मशहूर शायर शाहिद बस्तवी के आकस्मिक निधन पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम/ काव्य गोष्ठी का आयोजन फारूक ए आज़म पब्लिक स्कूल मोहल्ला मिल्लत नगर गांधीनगर बस्ती में किया गया इस प्रोग्राम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध राष्ट्रीय शायर शारिक खलीलाबादी ,विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध कवि पवन सबा कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद शायर ताजिर बस्तवी व प्रोग्राम का संचालन युवा शायर डॉ अफ़ज़ल हुसैन अफ़ज़ल ने किया।
मुख्य अतिथि शारिक खलीलाबादी ने शाहिद बस्तवी को खेराजे अकीदत पेश किया। उसके बाद कई गजलें पड़ीं, उनका यह शेर लोगों ने बेहद पसंद किया – मैं आज जिंदा हूं पढ़ लो मुझे मेरे बच्चों, फिर उसके बाद मिलुंगा कहानियों में तुम्हें, प्रसिद्ध कवि पवन सबा ने कुछ यूं कहा- ये खुदा खत्म मेरी खुशियों से अनबन कर दे, फिर से शादाब मेरे जिस्म का गुलशन कर दे, मेरी ख्वाहिश है सब दहर में हो अम्न वफ़ा, काश ये दुनिया मेरा पूर्ण समर्थन कर दे, उस्ताद शायर ताज़ीर बस्तवी ने – कुछ एक पल ही दबाए थे पांव बेटे ने मेरे बदन से कई साल की थकन उतरी
मौलाना अब्दुर्रब असद बस्तवी ने कहा – खुल ही जाएगा किस्मत का दर दोस्तों, पासकेगा खुदा की इनायात को, करके खिदमत बना लें वो जन्नत में घर, जिसने पाया बुढ़ापे में मां बाप को
डॉ अफ़ज़ल हुसैन अफ़ज़ल ने किरदारे मुहब्बत को निभाने में जल गये, दीपक की लव हवा से बचाने में जल गये, इन्साफ मेरे रब ने उसी वक्त कर दिया, वो लोग घर हमारा जलाने में जल गये, सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया
मशहूर शायर दीदार बस्तवी ने कहा- हर तरफ खुशियां रहेंगी गम निकाले जाएंगे, जिंदगी से प्यार के मौसम निकाले जाएंगे, इक खता पर तूने आदम को निकाला खुद से, कब महल से साहबे आलम निकाले जाएंगे
उर्दू अदब के मशहूर शायर/वरिष्ठ उर्दू पत्रकार असलम शादां ने बेहतरीन नात – वो नूरे अजल मुस्तफा मुजतबा है, नबी ए मुकर्रम वो खैरुल वरा है, चले आओ महबूब नालैन पहने, सरे अर्श रब्बे जहां की सदा है ,को लोगों ने खूब पसंद किया
सागर गोरखपुरी ने सुनाया – जब भी वो बेनकाब होते हैं, तब वो मिस्ले गुलाब होते हैं, अपनी काया पर क्या गुमां करना, अंत में हम तुराब होते हैं
मास्टर तौवाब अली ने कुछयूं कहा – छुप गया है गुलशन में वो गुलो का रखवाला , ढूंढती रही आंखें खो गया वो दिल वाला
शाद अहमद शाद ने रोमानी गजल सुनाई – आंखें कमाल है तेरी चेहरा कमल है, गालों पर है जो तिल तेरे पहरा कमाल है
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रिंसिपल वसीम सर, अब्दुल हक अंसारी, अब्दुल वसीम, अब्दुल लतीफ, मुकेश श्रीवास्तव मोहम्मद जलाल , अब्दुल रहीम, राजन पांडे, इब्राहिम, निदा अहसन, याकूब, फौजान, गयासुद्दीन, विपिन श्रीवास्तव, राजू, आदि लोगों ने मरहूम शाहिद बस्तवी को श्रद्धांजलि अर्पित की