देशवासियों में मायूसी
अजय दीक्षित
भारतीय खिलाडिय़ों के एक-के-बाद एक पोडियम पर चढऩे से पहले ही हारने से देशवासियों में बनती जा रही मायूसी को विनेश फोगाट की घटना ने दोगुना कर दिया है। मनु भाकर के दो कांस्य पदकों सहित निशानेबाजी में तीन पदक आने से देश में खुशी का जो माहौल बना था; वह दिग्गजों के फ्लॉप शो की वजह से ठण्डा पड़ता जा रहा था। इस बीच विनेश फोगाट के महिला कुश्ती ने किए प्रदर्शन देश का माहौल फिर से खुशनुमा बना दिया था। एक ही दिन में वह लगातार तीन मुकाबले जीतकर 50 किग्रा वर्ग की कुश्ती के फाइनल में पहुंच गईं थीं। वह यह उपलब्धि पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान थीं। उन्होंने जिस तरह से टोक्यो ओलम्पिक की स्वर्ण पदक विजेता और 82 मुकाबलों से अजेय बनी हुई सुसाकी को पहले राउण्ड में हराया, उससे देशवासियों को पहली बार सोने का तमगा आने का भरोसा हो गया था, लेकिन सौ ग्राम वजन ज्यादा आने पर उन्हें अयोग्य करके पदक से ही वंचित किये जाने से देश में सदमे जैसी स्थिति बन गई है। हालांकि अभी विनेश के सीएएस में अपील करने से रजत पदक मिलने की संभावनाएं बनी हुई हैं। अब सवाल यह है कि इतने देखभाल करने वालों के रहते वजन कैसे बढ़ गया? इस बात की जांच भी होनी ही चाहिये। हम सभी जानते हैं कि विनेश 53 किग्रा वर्ग में लड़ती रहीं हैं। वह वजन घटाकर इस वर्ग में लड़ रहीं थीं। इस तरह की खिलाड़ी का तो और भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिये था ।
विनेश को बहुत ही पक्के इरादे वाली पहलवान माना जाता है। यह वह कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीडऩ का मामला चलाकर दिखा चुकी हैं। इसके अलावा कभी कोई घटना उन्हें विचलित नहीं कर सकी। पर इस घटना ने उन्हें एकदम से तोड़ दिया है और इस कारण उन्होंने संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। इन हालात में देश के माहौल को अब पुरुष हाकी में कांस्य पदक और नीरज चोपड़ा का जेवेलिन में स्वर्ण पदक ही खुशनुमा बना सकता है। इससे पदक तालिका में भारत की स्थिति थोड़ी सम्मानजनक हो जाएगी। अन्यथा हम 2016 के रियो ओलम्पिक जैसे प्रदर्शन की तरफ बढ़ ही रहे हैं। रियो में भारत एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में 67वें स्थान पर रहा था। निश्चित रूप से विनेश फोगाट की घटना ने देशवासियों को हैरान-परेशान कर दिया ।