महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। अयाेध्याधाम के रामघाट बाईपास स्थित श्रीकिशाेरी कृपा कुंज का नया महंत लक्ष्मण दास काे बनाया गया। जिन्हें महंताई समाराेह के दरम्यान रामनगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता प्रदान किया। बता दें कि श्रीकिशाेरी कृपा कुंज के महंत रहे महामंडलेश्वर स्वामी जी महाराज महात्यागी का विगत 16 जुलाई को साकेतवास हाे गया था। तब से आश्रम की गद्दी खाली चल रही थी। जिस पर उनके कृपापात्र शिष्य लक्ष्मण दास की ताजपाेशी की गई। शुक्रवार को साकेतवासी महंत का सत्रहवीं संत भंडारा रहा। इस अवसर पर अयाेध्यानगरी के संत-महंत और धर्माचार्यों ने लक्ष्मण दास महाराज काे श्रीकिशाेरी कृपा कुंज का महंत नियुक्त किया। नवनियुक्त महंत लक्ष्मण दास ने कहा कि उनके गुरूदेव संत एवं गाै सेवी हाेने के साथ-साथ भजनानंदी संत रहे। संतत्व ताे उनमें देखते ही झलकता था। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उन्हें वेद, वेदांत, न्याय व साहित्य का अच्छा ज्ञान था। विद्वता में उन्हें महारथ हासिल रहा। उन्होंने सेवा काे ही अपना धर्म माना। आजीवन सेवा कार्याें से जुड़े रहे। उनके मार्गदर्शन में कई सेवा के कार्य संचालित भी हुए। गुरूदेव ने अपने शिष्य-अनुयायियाें एवं परिकराें काे सेवा कार्य करने हेतु प्रेरित किया। उन्हें सेवा का पाठ पढ़ाया। वह जीवन भर सेवा ही परमाेधर्मा: के मार्ग पर चलते रहे। गुरूदेव ने अयाेध्याधाम में एक विशाल आश्रम की स्थापना कर उसका कार्यभार संभाला। वह अब हमारे बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश और कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। उस रिक्त स्थान की पूर्ति भविष्य में कभी नही की जा सकती है। नये महंत ने कहा कि मंदिर में ठाकुरजी की सेवा के साथ-साथ गाै, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चलती रहेगी। गुरूदेव के बतलाए हुए मार्ग व पदचिंहाें पर चलकर मैं आगे बढूंगा। साथ ही मठ के सर्वांगीण विकास में कृत-संकल्पित रहूंगा। इस माैके पर संत-महंत, धर्माचार्य तथा भक्तजनों ने प्रसाद पाया। अंत में मठ के नवनियुक्त महंत लक्ष्मण दास महाराज ने आए हुए संत-महंत, धर्माचार्य, विशिष्टजनाें का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सम्मान किया। महंताई समाराेह में मुख्य रूप कनक महल के महंत सीताराम दास महात्यागी, जानकी कुंज महंत वीरेंद्र दास, महंत नित्यानंद दास हनुमानगढ़ी, महंत शंभू दास, महंत जानकी दास, अशोक सिंहल वार्ड के पार्षद अंकित त्रिपाठी समेत अन्य संत-महंत एवं मंदिर से जुड़े हुए भक्तगण उपस्थित रहे।