खुल गयी एक गांठ में बंधन न ढूंढो

खुल गयी एक गांठ में बंधन न ढूंढो
विषधरों की देह में चंदन न ढूंढो
रंग देखो, चाल भी हर फूल पर बैठे हुए
तितलियों के हाथ में कंगन ना ढूंढो।

-निधि मिश्रा

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