राष्ट्र भक्ति के सूत्र-आचार्य सुरेश जोशी

🌹 ओ३म् 🌹
📙 राष्ट्र भक्ति के सूत्र 📙
भारत वर्ष को यदि अपने विश्व गुरु पद को पुनः स्थापित करना है तो उसे अपने वर्तमान संविधान में तीन सुधार तत्काल करना चाहिए।
(१) संविधान नागरिकों के हित में हो! हमारे देश में ऐसा आज भी नहीं है। अनुच्छेद ३३३ के तहत आज बहुमत की सरकार होने (२०१४-२०२४) तक भी राष्ट्रपति द्वारा नामित दो अंग्रेज आज भी लोकसभा के अंदर बैठते हैं।
इंडियन एजूकेशन एक्ट, इंडियन पुलिस एक्ट आज भी हमारे देश के नागरिकों के हिसाब से नहीं है।
(२) भाषा की गुलामी।आज भी भारत हिंदी को अपनी राष्ट्र भाषा घोषित नहीं कर सका है।१९६८ के कानून को अविलंब हटाना होगा जिसमें लिखा है एक भी राज्य अंग्रेजी का समर्थन करेगा तो अंग्रेजी जारी रहेगी।। अनुच्छेद ३४३ को बदले बिना हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं हो सकती।
(३) आहार प्रणाली में सुधार। भारत सृष्टि सूं ही अहिंसक राष्ट्र रहा है। पशु बलि। उनके शरीर का व्यापार राष्ट्र की उन्नति में बाधक है।जब तक भारत में गो- हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग जाता तब तक राष्ट्र कै सहिष्णु बनाना संभव नहीं है। जनक्रांति ही इस समस्या पर नियंत्रण ला सकती है। सरकारें ओट बैंक की राजनीति करके जन आंदोलन को कुचलती है और जनता अज्ञान, अन्याय, अभाव के चलते गुलामी में जीने को मजबूर हो जाती है।
(४) नशा मुक्त राष्ट्र – जिस राष्ट्र के लोग नशे के व्यसन में लिप्त रहते हैं उस राष्ट्र में अनुसाशन, सदाचार व उन्नति के मार्ग समाप्त हो जाते हैं और राष्ट्र के नागरिक बलहीन, चरित्रहीन होकर राष्ट्र को कमजोर बनाते हैं। अतः जन क्रान्ति करके शराब बंदी कानून द्वारा राष्ट्र कै नशामुक्त बनाना ही पड़ेगा।
इस प्रकार श्रम,तप, संगठन व ईश्वर विश्वास के सिद्धांतों पर चलकर ही राष्ट्र की समस्याओं का अंत व राष्ट्र को समृद्ध, सशक्त व संस्कृत बनाया जा सकता है।
आचार्य सुरेश जोशी
वैदिक प्रवक्ता 🍁

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