महादेवी वर्मा की याद दिलाती हैं कवित्री ऊष्मा सजल की कविताएं,

अनुराग लक्ष्य, 15 दिसंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
अयोध्या, जैसे ही यह नाम कानों में गूंजता है। एक विशाल साम्राज्य, साहस, वीरता, पराक्रम, न्याय के साथ राम राज्य, और मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छवि आंखों के सामने तैरने लगती है। इसी पावन धरती से एक होनहार कवित्री का जन्म हुआ जिसे हिंदी साहित्य में साहित्य प्रेमी ऊष्मा सजल के नाम से जानते हैं और पहचानते हैं। आज उन्हें की एक उत्कीरिष्ट रचना अनुराग लक्ष्य ने आप समस्त पाठकों के बीच प्रस्तुत करने जा रही है। उम्मीद है कवित्री ऊष्मा सजल को आपका भरपूर प्यार, दुलार, स्नेह और सम्मान प्राप्त होगा ।

पधारो मोरे राम अवध नगरी,
विराजो मोरे राम अवध नगरी,
संवारो मोरे राम अवध नगरी, निहारो मोरे राम अवध नगरी,,,,

न बिसारयो मोरे राम अवध नगरी,
तोहे दरस परस नारि तरी,
आओ आओ मोरे राम अवध नगरी ,,,,

भव्य भवन के भाग संवारो
पुनः क्रिपा करि राज संभारो,
शुभ लगन सुमंगल नेक घरी
पधारो मोरे राम अवध नगरी,,,

प्रातहिं उठी नित चरण पखारूं
धूप दीप अक्षत सिर वारूं
चरन कमल रज शीष धरी
पधारो मोरे राम अवध नगरी,,,,

मंगल गीत सुमंगल वाणी
करहूं परणम जोरि जुग पाणी
हसरत अंखियां नेह भरी
पधारो मोरे राम अवध नगरी,,

काम क्रोध मद लोभ है घेरे
माया मोह निषाद घनेरे
बिन राम नाम भव नाहि तरी
पधारो मोरे राम अवध नगरी,,

,,,,,, ऊष्मा सजल, अयोध्या,,,

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