जी पी जी टी हिंदी शिक्षक डॉ ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ हुए सेवानिवृत्त, विद्यालय परिवार ने सम्मानित कर की भावुक विदाई

जी पी जी टी हिंदी शिक्षक डॉ ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ हुए सेवानिवृत्त, विद्यालय परिवार ने सम्मानित कर की भावुक विदाई

 

उन्नाव (उ. प्र.): पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय राजीवपुरम उन्नाव से जी पी जी टी हिंदी पद से 31 अक्टूबर 2026 को डॉ ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ सेवानिवृत्त हुए।

इस अवसर पर विद्यालय द्वारा आयोजित विदाई समारोह में कार्यक्रम का संचालन श्री पुरषोत्तम अवस्थी पी जी टी अंग्रेजी द्वारा किया गया। विद्यालय के सभी शिक्षकों शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने अपनी शुभकामनाएं मंगलकामनाएं और बधाई संदेश देते हुए डॉ ओम प्रकाश मिश्र के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित करते हुए उनकी सरलता विनम्रता एवं मृदुभाषी स्वभाव की भूरि-भूरि प्रसंशा की। विशेष अतिथि के रूप पूर्व शिष्य विशाल भारती के अभिभावक डॉ एन भारती ‘वैरागी’ ने इस अवसर पर उपस्थित होकर डॉ मिश्र जी का माल्यार्पण कर पुष्पगुच्छ शाल और साहित्य साधना पुस्तक भेंट की और अपनी काव्यात्मक प्रस्तुति से पूरे सभागार को गुंजायमान कर दिया। डॉ भारती ने बताया कि लोगों ने मिश्र के शिक्षक, साहित्यकार और दार्शनिक व्यक्तित्व को धीरे-धीरे समझा। अपने वक्तव्य में डा. वैरागी ने नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में डॉ ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत की हिंदी की वैश्विक सेवाओं का उल्लेख किया जिसमें तमाम विश्वभर के लोग जुड़े रहते हैं और अनेकानेक कार्यक्रम हुआ करते हैं।इसके उपरांत विशाल भारती पूर्व शिष्य ने अपनी श्रद्धा विगलित अभिव्यक्ति देते हुए डॉ मिश्र के स्वभाव एवं शिक्षण अधिगम पर प्रकाश डाला। शिक्षकों में श्री पुरषोत्तम अवस्थी, ए. के. कटियार, अरुण कुमार त्रिपाठी, अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, मौर्या जी, राजेश कुमार सिंह, श्रीमती पूनम सचान, डॉ स्फूर्ति श्रीवास्तव एवं अन्य सभी शिक्षक/ शिक्षिकाओं ने अपनी अभिव्यक्ति से भावविभोर कर दिया।

डॉ ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत जी ने अपनी विदाई पर भाव विभोर होकर सभी शिक्षक शिक्षिकाओं कर्मचारियों और प्राचार्या महोदया के प्रति आभार व्यक्त किया। तदोपरांत डॉ अवनीश मिश्र (पुत्र डॉ ओम प्रकाश मिश्र) जी ने सभी स्टाफ सदस्यों को अपने पिता एवं गुरु डॉ मिश्र जी के प्रारंभिक कार्यकाल से लेकर अंतिम उन्नाव तक की सेवाओं के साक्षी रूप में संपूर्ण व्यक्तित्व कृतित्व एवं सूदूर पूर्वोत्तर शिलांग रीजन में हिंदी की गौरवशाली सेवाओं का उल्लेख किया और सभी का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हुए अपने सेवानिवृत्त पिता के लिए पूर्णतः देखभाल के लिए सभी के समक्ष अपनी सहज सुलभ अभिव्यक्ति दी।अंतत: विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती प्रतिमा पुरी ने सेवानिवृत्त हो रहे डॉ मिश्र जी को माल्यार्पण कर शाल ओढ़ाकर श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तक भेट किया और स्टाफ सदस्यों के सम्मिलित सहयोग से अनेकानेक वस्तुएं और उपहार प्रदान किया। प्राचार्या महोदया ने डॉ मिश्र को स्वस्थ रहने और भविष्य में चिन्ता रहित जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा दिया और अभिव्यक्ति के उपरांत यह भी स्वीकार किया कि अधिकांश मामले में प्राचार्या महोदया भी नि: शब्द हैं मन के सभी भावों और संवेगों को व्यक्त करने में नि:शब्दता महसूस कर रही थी।

विदाई के समय अधिकांश शिक्षक शिक्षिकाओं के नेत्र सजल थे। डॉ मिश्र जी भी सजल नेत्रों से सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।