ज़मीं आसमा को मिलाती है आंखें।।

ग़ज़ल

छुपा दिल में क्या है बताती हैं आंखें।
मोहब्बत की दुनिया बसाती है आंखें।।

तुम्हें देखकर जगमगाती हैं आंखें।
ज़मीं आसमा को मिलाती है आंखें।।

कोई हंस रहा है कोई रो रहा है।
न जाने ये क्या क्या दिखाती है आंखें।।

अजब खेल है इन निगाहों का यारों‌
किसी को गिराती उठाती है आंखें।।

तेरे दर से निकला तो ये जान पाया।
हक़ीक़त से पर्दा उठाती है आंखें।।

निगाहों से होता है इज्हारे उल्फत।
नए ख़्वाब हर्षित दिखाती हैं आंखें।।

विनोद उपाध्याय हर्षित