लखनऊ । बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया, मुंबई के बीच 22 अक्टूबर को वित्तीय साक्षरता, निवेश संबंधी जागरूकता और बाजार की कार्यप्रणाली की समझ विकसित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को वित्तीय नियोजन, बचत, निवेश, शेयर बाजार और अन्य वित्तीय साधनों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ वित्तीय क्षेत्र की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराना, उनमें जिम्मेदार निवेश की समझ विकसित करना तथा भविष्य में बेहतर वित्तीय निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस अवसर पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, प्रो. ओम प्रकाश शुक्ला तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया की ओर से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अविष्कार नायक, वाइस प्रेसिडेंट जोगिंदर सिंह और उत्तर प्रदेश के स्टेट हेड श्रुति शर्मा उपस्थित रहीं।समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के साथ यह साझेदारी विद्यार्थियों के लिए वित्तीय क्षेत्र की बारीकियों को समझने और व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है। वर्तमान समय में वित्तीय जागरूकता और निवेश से संबंधित जानकारी प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक हो गई है। केवल शैक्षणिक योग्यता हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को धन के प्रबंधन, बचत की उपयोगिता, निवेश के विकल्पों और वित्तीय जोखिमों की समझ होना भी जरूरी है। इस सहयोग से विद्यार्थियों को इन सभी पहलुओं की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में बेहतर निर्णय ले सकेंगे।कुलपति ने कहा कि इस पहल के अंतर्गत विशेष रूप से अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को वित्तीय नियोजन, शेयर बाजार तथा निवेश के विभिन्न विकल्पों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही वित्तीय क्षेत्र की व्यावहारिक आवश्यकताओं को समझने और अपने कौशल को विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के योग्य शिक्षक इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। शिक्षकों की सहभागिता से प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा विद्यार्थियों को विषयों की सैद्धांतिक जानकारी के साथ उनके व्यावहारिक पक्षों को भी समझने का अवसर मिलेगा।
प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों में सीखने के साथ कमाई करने की क्षमता विकसित करना भी है। वित्तीय क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को देखते हुए निवेश और बाजार संबंधी ज्ञान युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से विद्यार्थी रोजगार के नए अवसरों को पहचान सकेंगे और भविष्य में आर्थिक रूप से अधिक जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूरी टीम को इस पहल के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि दोनों संस्थानों के बीच यह सहयोग विद्यार्थियों को वित्तीय रूप से जागरूक, कुशल और जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।इस समझौता ज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित वर्गों के बीच वित्तीय साक्षरता तथा वित्तीय बाजार के प्रति जागरूकता का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यक्तिगत वित्तीय नियोजन, बजट तैयार करने, बचत करने और निवेश के विभिन्न विकल्पों को समझने का अवसर मिलेगा। उन्हें शेयर बाजार की कार्यप्रणाली, म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और ऋण प्रतिभूतियों जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि वित्तीय संसाधनों का उचित प्रबंधन कैसे किया जाता है और अलग-अलग निवेश विकल्पों की प्रकृति, उपयोगिता तथा जोखिमों का आकलन किस प्रकार किया जा सकता है।समझौते के तहत वित्तीय बाजार में निवेश करने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों और अन्य लक्षित समूहों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की भूमिका, वित्तीय बाजार के नियामक प्रावधानों तथा निवेश संबंधी शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया से अवगत कराया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को निवेश के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें उपलब्ध अधिकारों, सुरक्षा उपायों और शिकायत निवारण के माध्यमों की जानकारी देना है। इससे विद्यार्थी वित्तीय बाजार में उपलब्ध अवसरों के साथ उससे जुड़े जोखिमों और सावधानियों को भी समझ सकेंगे।इस सहयोग के अंतर्गत विश्वविद्यालय योग्य शिक्षकों और अन्य पात्र व्यक्तियों को भागीदार प्रशिक्षक के रूप में नामित करेगा। निर्धारित योग्यता और प्रमाणन संबंधी मानकों को पूरा करने के बाद ये प्रशिक्षक विद्यार्थियों तथा अन्य लक्षित समूहों के लिए वित्तीय साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर सकेंगे। इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित प्रशिक्षकों का एक सशक्त समूह तैयार करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षकों के माध्यम से वित्तीय बाजार से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी अधिक से अधिक विद्यार्थियों और समाज के अन्य वर्गों तक पहुंचाई जा सकेगी। इससे वित्तीय शिक्षा को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और निवेश संबंधी भ्रांतियों को दूर करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों में जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार विकसित करना है, ताकि वे बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश करने के बजाय उपलब्ध विकल्पों का मूल्यांकन कर उचित निर्णय ले सकें। बजट निर्माण, बचत की आदत, निवेश की योजना, वित्तीय जोखिमों की पहचान और निवेशकों के अधिकारों की जानकारी जैसे विषय युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। विश्वविद्यालय और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की यह साझेदारी शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में भी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।कार्यक्रम में वित्त अधिकारी प्रो. सनातन नायक, अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. शिशिर कुमार, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा, डॉ. सुभाष मिश्रा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और शिक्षकगण मौजूद रहे। विश्वविद्यालय और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बीच हुए इस समझौते से विद्यार्थियों को वित्तीय बाजार की बेहतर समझ विकसित करने, निवेश संबंधी जानकारी हासिल करने और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप निर्णय लेने में सहायता मिलने की उम्मीद है।