महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। भगवदाचार्य स्मारक सदन में चल रही पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के अष्टम दिवस पर मंचन ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। इस पावन अवसर पर ‘निषाद मिलन’, ‘दशरथ मरण’ और ‘चित्रकूट प्रसंग’ जैसी हृदयस्पर्शी एवं भावपूर्ण लीलाओं का अत्यंत सजीव और दिव्य मंचन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भावुक कर देने वाले प्रसंगों का मंचन अष्टम दिवस की लीला की शुरुआत भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के श्रृंगवेरपुर पहुंचने और राजा निषादराज से मिलन के प्रसंग से हुई। इसके पश्चात अयोध्या में पुत्रवियोग में तड़पते राजा दशरथ के प्राण त्यागने की मर्मस्पर्शी घटना ने दर्शकों की आँखें नम कर दीं। लीला के अंतिम चरण में भरत मिलाप और चित्रकूट प्रसंग के माध्यम से भाई के प्रेम और त्याग का अनूठा संदेश दिया गया।
गणमान्य संतों और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति इस पावन अवसर पर संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष एवं बड़ा भक्तमाल पीठाधीश्वर महंत अवधेश कुमार दास महाराज, महामंत्री स्वामी संजय दास महाराज, नागा राम लखन दास महाराज, श्रृंगी ऋषि पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास महाराज, और राम कचेहरी के श्रीमहंत शशिकांत दास जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में प्रतिष्ठित व्यवसायी अजीत पांडेय ‘पिंटू’ , महंत धनुषधारी शुक्ला , महंत अनिरुद्ध शुक्ला , हनुमान बाग के पुजारी रोहित दास , महंत विराट दास सहित बड़ी संख्या में संत-महंत और धर्मप्रेमी श्रद्धालुजन मौजूद रहे। पुरोहित समाज से ओमप्रकाश पांडे, घनश्याम दास , अंबिका , दास घनश्याम दास , तन्मय दास , देवव्रत पांडेय एवं समिति के सचिव शिवम श्रीवास्तव ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।