प्रेस क्लब में छलकीं आंखें, थम गईं आवाजें! महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक अमित सिंह चौहान और सैकड़ों पत्रकारों ने स्व. राम सिंह को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 

तीन साल बाद फिर नम हुआ पत्रकार समाज—पिता की तस्वीर के सामने भावुक हुईं बेटी नीलम सिंह, श्रद्धांजलि सभा बनी संवेदनाओं का सैलाब

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। प्रेस क्लब फैजाबाद में शनिवार को ऐसा भावुक माहौल देखने को मिला, जहां शब्द कम पड़ गए और आंखों ने भावनाओं की पूरी कहानी बयां कर दी। स्वर्गीय राम सिंह की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या के पत्रकार समाज, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने एकजुट होकर दिवंगत राम सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। तीन वर्ष का लंबा वक्त गुजर जाने के बावजूद उनकी स्मृतियां आज भी परिवार और पत्रकार साथियों के बीच उतनी ही जीवंत दिखाई दीं।
श्रद्धांजलि सभा का शुभारंभ अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने किया। उन्होंने स्वर्गीय राम सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और दीप प्रज्ज्वलित कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। श्रद्धांजलि देते समय पूरा वातावरण गंभीर और भावुक नजर आया। महापौर ने कहा कि किसी अपने का बिछड़ना परिवार के लिए ऐसी कमी छोड़ जाता है, जिसे समय भी पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता। व्यक्ति भले ही हमारे बीच मौजूद न हो, लेकिन उसकी यादें, संस्कार और उससे जुड़े रिश्ते हमेशा जीवित रहते हैं। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार समाज केवल खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना भी उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का हिस्सा है।कार्यक्रम में बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान ने भी स्वर्गीय राम सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। विधायक ने कहा कि किसी प्रियजन को खोने का दर्द परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक होता है। उन्होंने राम सिंह की स्मृतियों को नमन करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि अपनों के साथ बिताए गए पल समय बीतने के साथ समाप्त नहीं होते, बल्कि यादों के रूप में हमेशा हमारे बीच बने रहते हैं।
लेकिन श्रद्धांजलि सभा का सबसे भावुक और मार्मिक क्षण उस समय सामने आया, जब स्वर्गीय राम सिंह की पुत्री नीलम सिंह, ब्यूरो हेड दहकती खबरें राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र एवं न्यूज़ चैनल, अयोध्या, ने अपने पिता के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। पिता की तस्वीर के सामने पहुंचते ही नीलम सिंह की आंखें नम हो उठीं। उन्होंने भावुक मन से पुष्प अर्पित कर अपने पिता को नमन किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद पत्रकारों को भी भावुक कर दिया। कुछ क्षणों के लिए मानो पूरा प्रेस क्लब शांत हो गया और हर चेहरा राम सिंह की यादों में डूबा दिखाई दिया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. तेज बहादुर सिंह ‘तेज’ ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने श्रद्धांजलि सभा को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाते हुए स्वर्गीय राम सिंह की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि पुण्यतिथि केवल किसी दिवंगत व्यक्ति को याद करने का अवसर नहीं होती, बल्कि उनके साथ जुड़े रिश्तों, अनुभवों और यादों को फिर से महसूस करने का अवसर भी होती है। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।
इस दौरान जिला पंचायत प्रतिनिधि आलोक सिंह रोहित ने भी स्वर्गीय राम सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव उर्फ अज्जू भैया, अरविंद कुमार तिवारी, ललित गुप्ता, सूर्य नारायण सिंह, सुबोध श्रीवास्तव, रूपेश श्रीवास्तव, बिजेंद्र प्रताप सिंह, राजेश श्रीवास्तव ‘स्वतंत्र चेतना’, पंकज पाठक, दिनेश सिंह, राजेंद्र दूबे, आकाश सोनी, प्रशांत शुक्ला नेटवर्क-10, प्रशांत शुक्ला वंदे भारत, शांतनु कृष्ण, नरेंद्र, सर्वेश, अतुल, अमित शंकर, अखिल, डॉ. टी.बी. सिंह, विवेक सिंह, मनोज श्रीवास्तव, ऋषभ, अभय, यश श्रीवास्तव, कृष्णा यादव, शांतनु, इति प्रकाश वर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार साथी मौजूद रहे।सभी पत्रकारों ने स्वर्गीय राम सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। प्रेस क्लब फैजाबाद में आयोजित यह सभा महज एक पुण्यतिथि कार्यक्रम बनकर नहीं रही, बल्कि यह पत्रकार समाज की सामूहिक संवेदना, एक साथी की स्मृतियों और पारिवारिक रिश्तों के सम्मान का भावुक मंच बन गई। तीन वर्ष बीत गए, लेकिन राम सिंह की यादें आज भी उनके परिवार और पत्रकार साथियों के बीच जिंदा हैं। नम आंखों, भारी मन और श्रद्धा से भरे वातावरण में महापौर, विधायक, पत्रकारों और गणमान्य लोगों ने एक साथ दिवंगत राम सिंह को नमन किया।प्रेस क्लब से निकला यह संदेश साफ था—समय गुजर सकता है, लेकिन अपनों की यादें और उनके साथ जुड़े रिश्ते कभी खत्म नहीं होते।