उप कमांडेंट रफाकत खान ने बताया सीआईएसएफ की नई ड्रोन सुरक्षा रणनीति
सीआईएसएफ-ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच एमओयू, एंटी-ड्रोन तकनीक से मजबूत होगी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा
नवीनगर। तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य और बढ़ते ड्रोन खतरे के बीच महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने बड़ा कदम उठाया है। सीआईएसएफ एवं ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक, विशेष प्रशिक्षण, फोरेंसिक विश्लेषण और संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती दी जाएगी।
एनपीजीसीएल नबीनगर के केऔसुब इकाई प्रभारी उप कमांडेंट श्री रफाकत खान ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को उभरते हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को विकसित करना है। इसके माध्यम से सुरक्षा बल के जवानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ संभावित ड्रोन खतरों की पहचान, निगरानी और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और विकसित किया जाएगा।
आरटीसी बहरोड़ बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
एमओयू के तहत राजस्थान स्थित सीआईएसएफ आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही सीआईएसएफ की सुरक्षा वाले महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए एसओपी और पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।
संयुक्त ड्रिल और रेड-टीमिंग से परखी जाएगी तैयारी
समझौते के तहत संयुक्त ड्रिल, रेड-टीमिंग, विशेष प्रशिक्षण तथा स्वदेशी तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा। ड्रोन से संबंधित घटनाओं के फोरेंसिक विश्लेषण और तकनीकी अध्ययन के जरिए सुरक्षा तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उप कमांडेंट श्री रफाकत खान ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए इससे जुड़े संभावित खतरों को समझना और उनसे निपटने की तकनीकी क्षमता विकसित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ और डीएफआई के बीच यह सहयोग सुरक्षा बल की तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और काउंटर-ड्रोन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के दौर में तकनीक के साथ कदमताल करना जरूरी है। ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक में दक्षता बढ़ने से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सतर्क, सक्षम एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा।