-भारतीय संस्कृति हमारी पहचान, संरक्षण जरूरी – संजय शुक्ल
बस्ती। भारतीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं का रंग बुधवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में देखने को मिला। डायट के स्वामी विवेकानंद सभागार में हमारी परंपरा एवं संस्कृति संबंधी कला प्रदर्शनी एवं संस्कृति महोत्सव-2026 का शुभारंभ डायट प्राचार्य संजय कुमार शुक्ल के निर्देशन में हुआ। दो दिवसीय महोत्सव में भारतीय संस्कृति की विविधता, लोककलाओं और पारंपरिक विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है। महोत्सव का समापन गुरुवार को होगा।
महोत्सव में चित्रकला एवं रेखांकन, लोक एवं पारंपरिक कला, हस्तशिल्प एवं शिल्पकला, नाट्य एवं लोकनृत्य, लोक संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ पारंपरिक वेशभूषा तथा भारतीय संस्कृति एवं विरासत से जुड़ी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। परिसर में सजी विभिन्न कलाकृतियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लोगों को अपनी समृद्ध परंपरा से रूबरू करा रही हैं।
डायट प्राचार्य ने पूरी टीम के साथ स्टालों पर पहुंचकर प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना किया। डायट प्राचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य विरासत है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को अपनी परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को करीब से समझने का अवसर मिलता है। संस्कृति के संरक्षण और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नोडल प्रवक्ता गोविंद प्रसाद ने बताया कि महोत्सव में विभिन्न विधाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति के विविध स्वरूपों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन की थीम अपनी संस्कृति, अपनी पहचान रखी गई है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। दो दिनों तक विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रदर्शनियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को गुरुवार को सम्मानित भी किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूकता पैदा करने के साथ ही लोककलाओं और पारंपरिक हुनर के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अलीउद्दीन खान, डॉ रविनाथ, कल्याण पाण्डेय, शशि दर्शन त्रिपाठी, मो. इमरान खान, कनिष्ठ सहायक नवनीत कुमार, अनिल चौधरी, प्रशिक्षुओ में ज्ञानेंद्र पटेल, चन्दन मिश्रा, ज्ञान प्रकाश गोंड आदि ने योगदान दिया।