महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना और मंदिर की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार की मांग तेज हो गई है। भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर मांग की है कि ट्रस्ट में सभी वर्गों, विशेषकर वनवासी समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। संगठन का कहना है कि राम मंदिर निर्माण पूरे हिंदू समाज के सामूहिक संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, इसलिए इसकी व्यवस्था में भी संपूर्ण समाज की भागीदारी झलकनी चाहिए।
वनवासी समाज से हो प्रधान पुजारी रामनयन दास
भक्ति आंदोलन मंच न्यास के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मार्गदर्शक विश्व हिंदी परिषद के सदस्य राजर्षि रामनयनदास रामायणी ने कहा कि भगवान श्रीराम संपूर्ण समाज के आराध्य हैं। उन्होंने विशेष रूप से मांग की कि राम मंदिर में वनवासी समाज से प्रधान पुजारी नियुक्त किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि, “भगवान राम का ‘रामत्व’ वनवासी समाज से ही जुड़ा है। अतः एक वनवासी पुजारी ही उनके आदर्शों को सही मायने में स्थापित कर पाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पुजारियों की नियुक्ति जाति-पांति के भेदभाव से ऊपर उठकर होनी चाहिए। राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बने ट्रस्ट करतालिया आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने ट्रस्ट में ‘सीईओ’ की व्यवस्था पर असहमति जताते हुए हनुमानगढ़ी की तर्ज पर ट्रस्ट का संचालन करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में किसी एक वर्ग विशेष का वर्चस्व न होकर सभी संतों, शंकराचार्यों और जगतगुरुओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। सामाजिक समरसता का संदेश रावत मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बालक महाराज ने कहा कि श्रीराम का जीवन समानता और समरसता का संदेश देता है। उन्होंने मांग की कि वर्षों से राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए संघर्ष करने वाले समर्पित साधकों को मंदिर की सेवा में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से वनवासी समाज के बीच कार्य कर रहा है, ऐसे में ट्रस्ट में इस समाज का प्रतिनिधित्व न होना पुनर्विचार का विषय है। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्माओं ने उपस्थिति दर्ज कराई और मंदिर की व्यवस्था को अधिक समावेशी और जन-सुलभ बनाने पर जोर दिया।