लखनऊ,। उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए बौद्ध आस्था और विरासत के केंद्र के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष 2025 में प्रदेश ने बौद्ध सर्किट के माध्यम से देश-विदेश के लगभग 82 लाख पर्यटकों का स्वागत किया, जिनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। विशेष रूप से कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरा, जहां विदेशी श्रद्धालुओं की सर्वाधिक आमद दर्ज की गई।प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज वैश्विक बौद्ध आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबी अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे राज्य में आगंतुक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हो रही है। सारनाथ, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, संकिसा, कौशांबी और कुशीनगर जैसे भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े पवित्र स्थलों को श्रद्धालु आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।पर्यटन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में इन स्थलों पर 61 लाख से अधिक पर्यटक आए थे, जिनमें 3.50 लाख विदेशी थे। वर्ष 2023 में लगभग 47 लाख पर्यटकों ने बौद्ध सर्किट का भ्रमण किया, जबकि वर्ष 2022 में यह संख्या 22.40 लाख रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट वैश्विक आस्था और आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।कुशीनगर, जो भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है, विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में यहां 2.90 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक पहुंचे। वर्ष 2024 में 2.51 लाख, वर्ष 2023 में 2.14 लाख तथा वर्ष 2022 में 41 हजार से अधिक विदेशी श्रद्धालुओं ने यहां आकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया।मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में सारनाथ को देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल कर ‘अनुभवात्मक सांस्कृतिक गंतव्य’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। अगस्त माह में लगभग 200 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश का दौरा करेगा। सारनाथ और कुशीनगर में जापानी बौद्ध संस्थानों की सक्रियता भारत-जापान के आध्यात्मिक संबंधों का प्रमाण है।श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से बड़ी संख्या में बौद्ध पर्यटक प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश आते हैं। प्रदेश का पर्यटन विभाग इन देशों के नागरिकों, भ्रमण प्रतिनिधियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नियमित रूप से परिचयात्मक यात्राएं आयोजित कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की सशक्त उपस्थिति और अधिक सुनिश्चित हो रही है।