पौली। पौली ब्लाक क्षेत्र के शंकरपुर (बक्शीजोत) में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान में अवध धाम से पधारे संत वरुणाचार्य जी महराज ने श्रोताओ को भक्ति ज्ञान व वैराग्य की संगीतमयी कथा का रसपान कराकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया.
भागवत कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कुंती ने भगवान से वरदान में दुख और विपत्ति की मांग किया। कुंती ने बताया कि सुख में लोग भगवान को भूल जाते हैं और दुखों के समय प्रभु का सदैव स्मरण करते हैं। कथा व्यास जी ने भीष्म स्तुति, परीक्षित का जन्म, पांडव स्वर्गारोहण, शुकदेव जी से परीक्षित का प्रश्न सहित अन्य प्रसंगों की कथा सुनाया राजा परीक्षित को ऋषि बालक के द्वारा सात दिन में मरने का श्राप दिया गया। इस श्राप से मुक्ति के लिए शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनाई.
श्रीमद् भागवत पुराण में 18 हजार श्लोक, 335 अध्याय, 12 स्कंध समाहित है। इस कथा में ज्ञान, भक्ति, वैराग्य का संगम है।संसार रूपी रोग को विनाश करने वाली यह कथा संसार में रहने व जीने का मर्म सिखाती है।
इस मौके पर यजमान कमलावती देवी, अमृतलाल, अनंतलाल, धर्मवीर, बालक राम, गोरखनाथ, अभय, सुनील कुमार, बबलू, प्रहलाद, रामवृक्ष, सत्यनारायण, जितेंद्र कुमार,भीष्म पितामह, गोपीचंद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।