दुनिया जिस भूख प्यास से डरती है, अल्लाह ने इस्लाम में उसे इबादत बना दिया, .,,,,,,,,,सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,,
अनुराग लक्ष्य, 18 फरवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
रमज़ान मुबारक तुम्हें रमज़ान मुबारक,
रोज़ा नमाज़ और तुम्हें क़ुरआन मुबारक ।
ऐ मोमिनों ख़ुल्द ए बरीं का तुम बनो हिस्सा,
अल्लाह का हर इक तुम्हें फरमान मुबारक ।।
जी हाँ, इस्लामी महीने का सबसे मुकद्दस महीना रमज़ान अपनी पूरी नेमतों के साथ आ गया है। जिसका हर मुसलमान गर्म जोशी के साथ ख़ैर मकदम कर रहा है। साथ ही मस्जिदें तरावीह की नमाज़ों के लिए पूरी तरह सज चुकी हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि यह दुनिया जिस भूख प्यास से डरती है, अल्लाह ने इस्लाम में उसे इबादत बना दिया। तभी तो मुसलमान इस महीने में अपनी भूख और प्यास को अपने रब के हवाले कर अपने मोमिन होने का सबूत देता है।
आज से मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ों का एहतमाम किया गया है और कल बृहस्पतिवार को पहला रोज़ा रखा जाएगा।
अल्लाह का करम हुआ रमज़ान आ गया,
हर सिम्त रहमतों का बादल भी छा गया ।
झड़ जाएंगे गुनाह भी मौला के करम से,
बच्चे जवान बूढ़े सभी को यह भा गया ।।
आपको बता ते चलें कि इस सच्चाई से कौन इंकार कर सकता है, कि, रोज़ा सिर्फ भूखा और प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि अपनी नफ़्स को पाक करने का नाम है जिसकी भट्टी में तपकर रोजेदार कुंदन बन जाता है। इसी लिए इस मुकाम पर आकर मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी यह कहने पर मजबूर हूं कि,
रमज़ान का महीना बड़ी बरकतों का है,
यह बरकतों के साथ बड़ी अज़मतों का है।
रोज़े रखो और दिल से तरावीह भी पढ़ो,
रमज़ान का महीना बड़ी नेमतों का है ।।