स्कूल से चौपाल तक टीबी चौंपियनों ने सुनाई आप बीती  

स्कूल से चौपाल तक टीबी चौंपियनों ने सुनाई आप बीती

जांच और पूरा इलाज ही टीबी से बचाव का रास्ता

टीबी चौंपियन की कहानी से जागरूक हो रहे गांव

 

बहराइच । जनपद में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ब्लॉक बलहा और नानपारा के उच्च प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मणपुर व मटेही में जागरूकता रैली आयोजित की गई। साथ ही विभिन्न आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को टीबी के प्रति जागरूक किया गया। अभियान में छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।

बैठक में टीबी चौंपियन गुलाम गौस ने बताया कि कुछ वर्ष पहले उन्हें लगातार खांसी और कमजोरी रहने लगी थी। जांच कराने पर टीबी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया कि यह पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। मुझे सरकारी अस्पताल से निःशुल्क दवा मिली और छह महीने तक नियमित उपचार लिया। आज मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ। उन्होंने लोगों से अपील की कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, रात में पसीना या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं और दवा का पूरा कोर्स करें। अधूरे इलाज से टीबी और गंभीर हो सकती है।

ब्लॉक मिहीपुरवा के आरोग्य मंदिर उर्रा में टीबी चौंपियन कृती कुशवाहा ने बताया कि टीबी खांसने-छींकने से फैलती है, इसलिए समय पर जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जाती है। बैठक में आशा और सीएचओ ने जांच व उपचार की जानकारी दी। इसी क्रम में ब्लॉक हुजूरपुर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर आदिलपुर में टीबी चौंपियन सुरेश पाल सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि सरकारी अस्पतालों में बलगम जांच, एक्स-रे और सीबी-नॉट मशीन की सुविधा उपलब्ध है। पुष्टि होने पर मरीज का पंजीकरण कर निःशुल्क दवा दी जाती है और स्वास्थ्य टीम नियमित निगरानी करती है।

वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स से विकास चंद्र सिंह ने बताया कि जनपद में 419 टीबी चौंपियनों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। ये सभी इलाज कर स्वयं इस बीमारी से स्वस्थ हुए हैं, इसलिए इनकी बातों का समुदाय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम. एल. वर्मा ने बताया कि वर्तमान में जिले में लगभग 6100 टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है। सभी मरीजों को निःशुल्क जांच, दवा, निक्षय पोषण योजना का लाभ और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति बीच में उपचार न छोड़े।

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